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Mau News: मंत्री के आदेश के तीन महीने बाद भी नहीं बढ़े बेड, डायलिसिस के लिए 350 मरीजों की वेटिंग लिस्ट

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जिला अस्पताल ​स्थित डायलिसीस यूनिट में मरीजों का डायलिसीस करते स्वास्थ्यकर्मी।संवाद - फोटो : mathura
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मऊ। जिले के प्रभारी मंत्री गिरिश चंद्र यादव के आदेश के तीन महीने बाद भी जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए बेड नहीं बढ़ाए गए हैं। इससे डायलिसिस के लिए आने वाले किडनी के तीन से चार मरीजों को रोज अगली डेट देकर स्वास्थ्य कर्मी वापस भेज दे रहे हैं। 350 मरीजों की वेटिंग लिस्ट है।
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जिला अस्पताल में पहुंचने वाले किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को तीन डायलिसिस की सुविधा समय से नहीं मिल पा रही है। डायलिसिस के लिए मरीजों को अन्य शहरों के केंद्रों पर जाना पड़ रहा है या फिर निजी केंद्रों पर महंगी दर पर डायलिसिस करानी पड़ रही है। जिले के प्रभारी मंत्री गिरिशचंद्र यादव ने मई में जिला प्रशासन के साथ जिला अस्पताल प्रबंधन को बेड बढ़ाने का निर्देश दिया था। उधर अस्पताल प्रबंधन इस संबंध में बीते मार्च से पांच बार बेड बढ़ाने का प्रस्ताव शासन, जिला प्रशासन को भेजने का दावा कर रहा है। बताते चलें कि जिला अस्पताल में मरीजों के डायलिसिस के लिए चार सितंबर 2021 में दीपचंद डायलिसिस सेंटर की स्थापना पीपीपी मॉडल पर की गई है। उस समय छह मशीनें लगाई गई थीं। जहां मरीजों की वेटिंग बढ़ने पर मई 2023 में चार नई मशीन लगाई गईं, इससे सेंटर पर और मरीजों का डायलिसिस का लाभ मिलने लगा है।
मऊ के साथ पड़ोसी जिले के मरीज भी आते हैं
यहां पर जनपद के साथ पड़ाेस के गाजीपुर, गोरखपुर, आजमगढ़ और बलिया से भी मरीज आकर डायलिसिस करा रहे हैं।बीते जनवरी 2024 से डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या बेड के हिसाब से 10 गुना अधिक होने के चलते यहां वेटिंग लिस्ट 350 तक पहुंच गई है। ऐसे में यहां मई से नए मरीजों की डायलिसिस प्रभावित है। बीते 90 दिनों में केवल 93 नए मरीजों का डायलिसिस हुई है। मंत्री के निर्देश को तीन महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद यहां बेड तो नहीं बढ़े लेकिन यहां वेटिंग की स्थिति जरूर बढ़ गई है। डायलिसिस सेंटर के मैनेजर वशिष्ठ कुमार ने बताया कि एक सितंबर को 78 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। अगस्त में इनकी संख्या 90 पर पहुंच गई। बताया कि बीते तीन महीने में केवल नए मरीजों का डायलिसिस हुआ, उधर, दूसरे नए मरीजों को बेड सीमित मात्रा में होने से मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। यहां मात्र 10 बेड होने से मरीजों की लंबी कतार लगी है। रोजाना 28 से 30 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। अस्पताल प्रशासन ने दस और बेड बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। दस और बेड बढ़ जाने से सेंटर में रोजाना 63 मरीजों की डायलिसिस हो सकेगी। जबकि हर महीने यहां 1800 मरीजों की डायलिसिस की जा सकेगी।
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तीन महीने में आएगी बारी, इसलिए निशुल्क के बजाए निजी अस्पताल में करा रहे डायलिसिस
बेड न बढ़ने से यहां लंबी वेटिंग लिस्ट के चलते तीन महीने में 90 फीसदी नए मरीज की डायलिसिस नहीं हो पा रही है। इसलिए निशुल्क के बजाए निजी अस्पताल में डायलिसिस करा रहे हैं। आंकड़े देखें तो जून में 29, जुलाई में 28, अगस्त में 36 नए मरीजों की डायलिसिस हुई, जबकि 350 नए मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं। चौंकाने वाली बात है कि वेटिंग लिस्ट में शामिल नए मरीजों में 25 से 40 वर्ष के मरीजों की संख्या 40 फीसदी है। उधर लंबी वेटिंग के चलते डायलिसिस की तत्काल जरूरत पर यह नए मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों में डायलिसिस करानी पड़ रही है।

कैसे हाेती है डायलिसिस

मरीज को डायलिसिस के लिए किसी किडनी के डॉक्टर का रेफर पर्चा अनिवार्य होता है। जिस पर चिकित्सक के डायलिसिस कराने की परामर्श होता है। चिकित्सक की सलाह के बाद मरीज का सेंटर पर पंजीकरण होता है। मरीज को आधार कार्ड के साथ दो फोटो लाना अनिवार्य है।



कोट
जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में बेड बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। मंजूरी मिलने के बाद ही बेड बढ़ाए जाएंगे और नई मशीन भी लगेगी। इससे ज्यादा मरीजों का लाभ मिलेगा। इसे लेकर जिला प्रशासन और शासन को पांच बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
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डॉ. धनंजय कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल
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