दोहरीघाट में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर सजा घाट। संवाद
दोहरीघाट कस्बे के सरयू नदी किनारे रामघाट पर रविवार को मौनी अमावस्या पर हजारों श्रद्धालु स्नान ध्यान के लिए जुटेंगे। स्नान पर्व को लेकर जहां कस्बे के विभिन्न घाटों की सफाई के नाम पर सिर्फ नगर पंचायत द्वारा औपचारिकता ही पूरी की गई।
वहीं कस्बे के एक मात्र रामघाट पर ही स्नान को लेकर तैयारियां पूरी हो गई। नदी में बैरिकेटिंग के साथ ही चेतावनी बोर्ड भी लगाया गया है। वहीं गहरे पानी में जाकर स्नान न करने चेतावनी बोर्ड लगाया गया है।
मौनी अमावस्या का मुख्य महत्व मौन व्रत से जुड़ा है. मान्यता है कि इस दिन मौन धारण कर स्नान, ध्यान और पूजा करने से मन की शुद्धि होती है और आत्मिक शांति मिलती है. इसी कारण इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है।
इसी मान्यता के तहत जिले के विभिन्न इलाकों से श्रद्धालु नदी में डुबकी लगाएंगे। साथ ही विधि विधान से पूजन अर्चन करेंगे। इस संबंध में मुहम्मदाबादगोहना कस्बा निवासी पं. विरेद्र शुक्ल ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर किए गए जप-तप और सेवा कार्य साधक को विशेष पुण्य प्रदान करते हैं।
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है। कस्बे के रामजानकी घाट और गौरीशंकर घाट पर स्नान करने की मनाही है, क्योंकि वहां स्नान करना जान जोखिम में डालना है।
दो दर्जन नावों को लगाया गया है। ईओ मनोज कुमार ने बताया कि स्नान और मेले को देखते हुए व्यापक तैयारी की गई है। बाहरी दुकानों को पटरी के दोनों तरफ कम जगह में ही दुकान लगाने को कहा गया है। साथ ही पूरे रामघाट की अच्छे से साफ-सफाई तथा अलाव की व्यवस्था समुचित तरीके से की गई है।