मऊ। हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में जिले में बाइक के मॉडिफाइड साइलेंसर के विरूद्ध अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के क्रम में जिले भर में बड़े स्तर का अभियान चलाया जा रहा है। शहर में यातायात विभाग ने चार टीमें बनाई हैं जो नगर के विभिन्न चौराहों पर माडिफाइड बाइक चालकों की धर-पकड़ के साथ उनका चालान काट रही है। अबतक जिले में लाखों रुपए का चालान काटने के साथ कईयों की बाइकों को साइलेंसर बदलवाया गया है।
संभागीय परिवहन विभाग और यातायात विभाग द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है। पिछले 20 दिनों से चल रहे इस अभियान के तहत कुल 61 तेज आवाज करने वाले बाइकों का चालान किया गया। जबकि 12 बाइकों का साइलेंसर बदलवाया गया। अब तक कुल 6.10 लाख रुपए का चालान काटा गया है।
एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है। बुलेट बाइक में तेज आवाज वाली साइलेंसर लगाकर चल रहे लोगों को जागरूक करने के साथ उन्हें साइलेंसर बदलवाने का एक मौका भी दिया जा रहा है। इसके साथ ही दुकानदारों को ऐसे साइलेंसर ना बेचने की हिदायत भी दी जा रही है।
टीएसआई संतोष कुमार यादव ने बताया कि बाइक की मॉडिफाइड साइलेंसर के विरूद्ध अभियान के क्रम में उनके नेतृत्व में शहर में चार मोबाइल टीमें बनाई गई है। यह टीम नगर के प्रमुख चौराहों पर बाइकों में लगे साइलेंसर की जांच कर उनका चालान कर रही है। अब तक 61 वाहनों का चालान काटा जा चुका है। 12 बाइक चालकों ने समझदारी दिखाते हुए टीम के सामने ही साइलेंसर को बदलवाया है। साइलेंसर के तेज आवाज करने पर वाहन चालक का 10 हजार रुपए का चालान काटा जा रहा है।
दुर्घटना का बना रहता है खतरा
मऊ। वर्तमान समय में बुलेट बाइक का क्रेज युवाओं में काफी बढ़ा है। इन बाइकों में तेज आवाज वाली साइलेंसर लगवाकर चलना युवाओं की पहली पसंद बनी हुई है। लेकिन इस पर नकेल कसने के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर अभियान चलाया जा रहा है। बुलेट बाइक चालक माडिफाइड साइलेंसर लगाकर तेज रफ्तार में धड़धड़ाते हुए निकलने से सड़क पर चलने वाले काफी लोग डर जाते हैं। इसके साथ ही कई बार घबराहट में बुजुर्ग बाइक सवार दुर्घटना ग्रस्त भी हो जाते हैं।
तेज आवाज से हार्ट अटैक का खतरा
मऊ। चिकित्सकों की माने तो बाइकों के साइलेंसर से निकलने वाले तेज आवाज से हृदय रोगियों को अटैक भी आ सकता है। बाइक से निकाले जाने वाली पटाखे की आवाज बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इसके साथ ही नवजात बच्चों पर भी बुरा असर पड़ता है। तेज आवाज बच्चों के कान को नुकसान पहुंचाकर उनकी सुनने की क्षमता को कम कर सकती है।