मऊ। मंगलवार को मौसम में बदलाव नजर आया। तड़के से शुरू हुई सर्द हवा के झोकों से ठिठुरन बढ़ गई। दोपहर बाद हल्की बारिश शुरू होने के बाद बाजार में सन्नाटा की स्थिति रही। लोगों को भीगते हुए अपने गंतव्य को जाते दिखे। आकाश मेें घने बादल छाने से दिन में ही अंधेरा हो गया। वाहन चालक हेडलाइट जलाकर घर व गंतव्य को जाते देखे गए। क्षेत्र में अलाव न जलाने से लोग यत्र तत्र अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने का प्रयास करते दिखे।
इससे पूर्व सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। गलन भरी ठंड होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बीच-बीच में हल्की धूप तो निकली लेकिन सर्द हवाओं के आगे धूप बेअसर रही। पूरे दिन लोग ठिठुरते नजर आए। बारिश होने की संभावना से किसान अपनी फसल को लेकर चिंतित दिखे। शीतलहर का प्रकोप जारी रहने के बाद भी सार्वजनिक स्थलों पर अलाव नहीं जलवाया जा सका है। सुबह लगभग सात बजे आसमान में बादल छा गए। बीच-बीच में हल्की धूप निकल रही थी लेकिन सर्द हवा के चलते असर नहीं हो रहा था। लोग दिन भर ठिठुरते रहे। रेलवे तथा रोडवेज पर प्रतीक्षारत यात्रियों का हाल बेहाल रहा।
तापमान पर नजर डाला जाए तो अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहा। आद्रता 71 प्रतिशत रही। जबकि 13 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही थी। जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलवार 50-50 हजार रुपया जारी किया गया है।
वैज्ञानिकों ने बारिश को बताया फायदेमंद
बढुआगोदाम। मौसम के बदले मिजाज के चलते मंगलवार की सुबह से ही बादल छाये रहने के बाद शाम को क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में हुई बारिश से ठंड में इजाफा हो गया। बारिश होने से किसानों के चेहरे खिले नजर आए। वैज्ञानिको और किसानों के अनुसार यह बारिश रबी की फसलों के लिए सोने पर सुहागा होगी। मंगलवार की शाम करीब चार बजे के करीब बारिश होने से ठंड बढ़ गई। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि रबी की फसल के लिए कड़ाके की ठंड और कोहरा जरूरी होता है।
मंगलवार की बारिश के बाद से कोहरा भी नजर आएगा। जिससे रबी की फसल को फायदा होगा। बारिश के कोहरे और ठंड से सीजन की फसल बेहतर होने की उम्मीद जागी है, क्योंकि यह बारिश रबी फसलों के लिए फायदेमंद साबित होगी। यह बारिश सरसों, जौ, मटर, चना, मसूर और गेहूं की फसल को फायदा करेगी। बारिश की बूंदे सीधे तना और पत्तों के बीच चली जाती है। जिससे फसल अच्छी होती है। क्योंकि यह समय गेहूं और जौ की सिंचाई का बेहतर समय होता है। फसल को इस समय पानी और नमी की भरपूर आवश्यकता होती है। जिससे गेहूं, चना, सरसों की अच्छी फसल के लिए पौधों पर टपकी बारिश की यह बूंदे लाभदायक है। क्योंकि यह सिंचाई और नमी की कमी दूर कर पौधों में बढ़ोतरी करेगी।