मऊ। बेघर गरीबों को पक्के मकान देने का सरकार का वादा वास्तविकता के धरातल पूरी तरह खरा उतरता नहीं दिखाई दे रहा है। दफ्तरों में जुगाड़ बिठाकर बंगला गाड़ी वाले लोग आवास पा जा रहे हैं। लेकिन गरीब पात्रों के हिस्से में लंबा इंतजार आ रहा है। दफ्तर पहुंचने पर उन्हें उनकी बारी आने का इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है। आवास पाने के लिए इंतजार करते करते पात्रों की आंखें पथरा गई हैं। लेकिन उनकी बारी है कि आगे खिसकती ही जा रही है।
सरकार की ओर से गरीब बेघरों को पक्का मकान बनवाने का वादा किया गया है। इसके लिए प्रधान मंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना का संचालन होता है। इस वर्ष जिले में 4566 आवासों का लक्ष्य आवंटित हुआ है। इतने आवासों की मंजूरी के बाद बजट भी उपलब्ध हो गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इनमें 4511 का डोंगल लगा दिया गया है। 4485 लाभार्थियों के खातों में पहली किश्त भेजी जा चुकी है। जबकि मुख्यमंत्री आवास योजना के लिए महज 66 आवास का लक्ष्य है। 66 आवासों के लिए बजट की स्वीकृति है।
इनमें से 49 आवास पूरे हो चुके हैं। लेकिन इनमें से बहुत से ऐसे लाभार्थी हैं जिनके पास पक्की कोठी है, ट्रैक्टर है, नलकूप है। लेकिन उनको जुगाड़ और कमीशन के चलते आवास मिल गया है। दफ्तरों में अनियमितता का आलम यह है कि पात्र इंतजार करते ही रह जा रहे हैं , उन्हें आवास नहीं मिल पा रहा है लेकिन जुगाड़ और कमीशन देने वालों को एक नहीं दो दो आवास दे दिए जा रहे हैं। रतनपुरा ब्लाक के रतनपुरा गांव में तीन पात्र व्यक्तियों कोअपात्र करार दिया गया है। शिकायत होने पर हुई जांच में दोषी पाए जाने पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने सेक्रेटरी को निलंबित कर दिया है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार आवास के लिए 20 हजार सुविधा शुल्क की दर नियत हो गई। जो लोग यह रकम चुकाते हैं, उन्हें आसानी सेे आवास आवंटित कर दिया जाता है। चूंकि पात्र गरीब रकम चुका पाने में असमर्थ होते हैं तो उसे आवास देने में तरह तरह की बाधा उत्पन्न की जाती है और उसका नाम सूची में नीचे सरकता जाता है।
केस एक
मऊ। रतनपुरा ब्लाक के विभौली ग्राम पंचायत की मंजू यादव का कच्चा घर कई साल पहले ही गिर गया था। मंजू पत्नी अमरजीत ने आवास के लिए आवेदन किया लेकिन उसे आवास नहीं मिला । मंजू का दिव्यांग पति 150 बार रतनपुरा ब्लाक पर जाकर आवास देने की गुहार लगा चुका है। लेनिक रह बाद उसे कह दिया जाता है। उसकी बारी अभी नहीं आई है। मंजू अपन चार बच्चों के साथ प्लास्टिक डालकर गुजर बसर करती है।
केस दो
बढ़ुआगोदाम। परदहा ब्लाक के ताजोपुर गांव निवासी फागू राजभर,चंदन राजभर, टनमन राजभर और अजय बहादुर पांडेय प्रधान मंत्री आवास पाने के लिए सभी पात्रता पूरी करते हैं। इन लोगों ने पांच साल पहले से आवास के लिए आवेदन किया है। लेकिन इन्हें आवास नहीं मिला।
केस तीन
मधुबन। फतहपुर मंडाव ब्लाक के अलीपुर गांव की कंचन तिवारी भूमि व आवास विहीन हैं। इन्होंने आवास के लिए आवेदन भी किया था लेकिन सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई। गांव में अनेक लोगों को आवास दिया गया है। पात्र होते हुए भी यह विधवा महिला आवास से बंचित है। उसकी पांच लड़कियां व दो लड़के हैं। इस साल ग्रामीणों के सहयोग से बड़ी लड़की की शादी हुई थी। यह महिला दो बार ग्राम पंचायत सदस्य भी रही है एवं इस समय बीडीसी सदस्य भी है। संपूर्ण समाधान दिवस के अलावा मुख्यमंत्री कार्यलय व प्रधानमंत्री कार्यालय का भी दरवाजा खटखटाया लेकिन उन्हें आवास नसीब नहीं हो सका। शासन ,प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से इनका भरोसा उठ चुका है।
डीआरडीए के परियोजना निदेशक एमएन द्विवेदी ने बताया कि आवास प्लस के तहत किए गए सर्वे के बाद बनी सूची से पात्रों को आवास आवंटित किए जाते हैं। यदि त्रुटि वश किसी अपात्र को आवास आवंटित हो गया है तो उसका निरस्त करके दूसरे को दिया जाता है। अपात्र से धन की वसूली कराई जाती है। सुविधा शुल्क अथवा कमीशन के आरोप निराधार हैं।