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अथर्व वेद की ऋचाओं से ग़ूंजा पंडाल

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हलधरपुर रतनपुरा क्षेत्र के कड़वरा में रविवार को काशी दास पूजा विधि विधान से संपन्न हुई। कड़वरा गांव निवासी राम अवतार यादव और प्रभुनाथ यादव की ओर से काशीदास पूजा को पंथी अशोक यादव ने विधि विधान से संपन्न कराया। पंथी ने बताया कि द्वापर युग से चली आ रही काशीनाथ बाबा की पूजा से लोगों को यह सीख मिलती है कि यदि पूरी आस्था और संपूर्ण विश्वास से प्रभु का स्मरण किया जाए तो वे भक्तों को कभी निराश नहीं करते और उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करते हैं।
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पंथी ने बताया कि काशीदास कली पूजा में लोक कल्याण की भावना निहित है। इस पूजा को कभी भी व्यक्ति विशेष की ओर से की गई पूजा नहीं मानना चाहिए। इसी भावना से इस पूजा में प्रयुक्त होने वालली सामग्री समाज के सभी लोगों की ओर से प्रस्तुुत कली जाती है। हवन कुंड में दी जाने वाली आहुतियों से वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है। मंत्रों के आह्वान से यज्ञशाला के लिए अग्नि प्रज्वलित करके पंथी ने यज्ञ कराया। पं. जय गोविंद मिश्र के नेतृत्व में वेदपाठी ब्राह्मणों के अथर्व वेद की ऋचाओं के सस्वर पाठ वातावरण मनोरम एवं अध्यात्मिक हो गया।
पंथी ने जलते अंगारे पर चलकर लोगों को चकित कर दिया। पंथी ने बताया कि मान्यता है कि कृष्ण अवतार में गोकुल में देवताओं के राजा इंद्र को प्रसन्न करने के लिए एक विशेष पूजा नगरवासियों द्वारा की जाती थी लेकिन भगवान कृष्ण ने उस पूजा को बंद करा दिया। कालांतर में काशीनाथ बाबा के नाम से पूजा आज तक चली आ रही है। यह पूजा वर्षा, इंसानों और पशु के आरोग्य , लोक कल्याण एवं सामाजिक समरसता के लिए की जाती है। पूजा के दौरान श्रीकृष्ण एवं वन सती तथा मां दुर्गा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया था। इस अवसर पर पंथी ने मौसम और बीमारियों से संबंधित कुछ भविष्यवाणियां भी कीं। इस मौके पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूजा में भाग लिया और प्रसाद चखा।
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