मऊ। शासन से गाइडलाइन के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सुस्त नजर आ रहे हैं। जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास टीबी के मरीजों के लिए मात्र एक सप्ताह की दवाओं का स्टॉक है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जरूरत के मुताबिक दवाएं नहीं खरीदीं, इससे दवाओं का संकट गहराया है।
जिले में टीबी मरीजों की दवा उपलब्ध नहीं होने के बाद शासन स्तर से दवाओं को स्थानीय स्तर से खरीदारी का निर्देश दिया गया था। मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के सीएमएस को दवा खरीदने का निर्देश था। अभी तक सिर्फ सीएमओ की ओर से ही दवाओं की खरीदारी की गई है। विभाग का दावा है कि दो से तीन दिन में ही सीएमएस स्तर से भी खरीदारी पूरी कर ली जाएगी। सिर्फ मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से एक लाख रुपये की दवा ही खरीदी गई है। जबकि शासन ने सीएमओ सहित दो अन्य सीएमएस को तीन लाख रुपये की दवा खरीदने के लिए कहा था। खरीदी गई दवाओं में 4 एफडीसी और 3 एफडीसी की दवाएं शामिल हैं। यह सभी दवाएं टीबी की रूटीन दवा में है। जबकि एमडीआर टीबी के मरीजों के सामने भी दवा का संकट गहरा गया है। विभाग के सूत्रों का कहना है कि जनपद में एमडीआर के टीबी के मरीजों की जितनी दवा की आवश्यकता है उससे कम दवा इस बार मिली है।
सीएमओ की ओर से टीवी के रूटीन की दवा उपलब्ध करा दी गई है जबकि जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के सीएमएस द्वारा अभी तक दवा उपलब्ध नहीं कराई गई है। दोनों ने दो से तीन दिन के भीतर दवा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
- डॉ. आरके सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी