मऊ। जिले में सरकारी अस्पतालों में इलाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के तमाम दावे कागजी साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग केे जिम्मेदारों की शिथिलता से तमाम प्रयासों के बाद भी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। कहीं डॉक्टर नदारद रहते हैं तो कई स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्टों के भरोसे चल संचालित हो रहे हैं। ऐसी ही स्थिति मधुबन तहसील के देेवारांचल के सुग्गीचौरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखने को मिल रही है। इस अस्पताल में बीते 20 दिन से एक भी चिकित्सक नहीं हैं, ऐसे में यहां आने वाले मरीजों का उपचार तैनात फार्मासिस्ट द्वारा किया जा रहा है।
मधुबन तहसील के देवारांचल कस्बे के सिसवा, बलुआ, धर्मपुर, परसिया, लोकया, पिपरा, कचिला, भठिया सहित करीब 15 से ज्यादा गांव के 50 हजार से ज्यादा आबादी के लिए 31 मार्च 1998 को सुग्गीचौरी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। पांच बेड वाले इस अस्पताल में आने वाले मरीजों का चिकित्सीय उपचार केे लिए दो चिकित्सक के पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन वर्तमान में इस अस्पताल में एक भी चिकित्सक नहीं है। हालात यह है कि बीते कई दिनों से अस्पताल में आने वाले 20 से ज्यादा मरीजों का उपचार तैनात फार्मासिस्ट अशोक सिंह द्वारा किया जा रहा है। गंभीर मरीजों के आने पर फार्मासिस्ट द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद उसे सात किमी दूर फतेहपुर मंडाव सीएचसी रेफर किया जा रहा है।
तैनात कर्मचारियों की माने तो यहां तैनात चिकित्सक डॉ. एम जैन का बीते तीन अगस्त 2021 को देवरिया जिले में स्थानांतरण होने के बाद दूूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं यहां बीतेे चार वर्षो से एएनएम का पद, लैब सहायक तथा वार्ड ब्याय का पद भी रिक्त चल रहा है। वर्तमान में इस अस्पताल में फार्मासिस्ट, स्वीपर तथा एक नान मेडिकल कर्मचारी की तैनाती है। इसमें तैनात स्वीपर की तैनाती भी 20 दिन पूर्व की गई है।
बिजली तक की नहीं हैं सुविधा
मधुबन। लिलवहा निवासी राजेश यादव ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में साफ सफाई तथा टूटी बांउड्री वाल की समस्या भी बनी हुई है।सुग्गीचौरी निवासी रमेश यादव ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक की कमी तो है ही, यहां सबसे बड़ी समस्या बिजली व्यवस्था न होना भी है। धर्मपुर गांव निवासी राजेश पटेल का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सक की तैनाती को लेकर कई बार विभागीय आला अधिकारियों को भी अवगत करा चुके है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं लोकया निवासी हरीलाल यादव का कहना है कि कागजों में ही इस अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। न तो यहां डाक्टर है न ही कोई जांच की सुविधा।