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Mau News: जिले में चीनी मिल फिर भी गन्ने की खेती से तौबा

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मऊ। किसानों का गन्ना की खेती से मोहभंग होता जा रहा है। इसकी वजह रेडरॉट बीमारी और समय से गन्ना भुगतान नहीं होना है। इस कारण वह अपनी पूंजी नहीं निकाल पा रहे हैं। बीते दस वर्षो में लगभग 49 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल गन्ने की खेती में कमी हुई है। जबकि पेराई सत्र 2021-22 की तुलना में 2022-23 में 396 हेक्टेयर क्षेत्रफल की वृद्धि हुई है। घाटे का सौदा बनने के कारण किसान अन्य फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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एक जमाना था जब जिले के घोसी, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना और सदर तहसील क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर गन्ने की खेती होती थी। लेकिन विभागीय उदासीनता से गन्ना का रकबा प्रतिवर्ष घटता जा रहा है। गन्ने का रकबा बीते दस सालों में आधा रह गया है। जबकि यह पांच साल पहले की तुलना में करीब तीन हजार हेक्टेयर कम है। पहले किसान अन्य फसलों की अपेक्षा व्यापक पैमाने पर गन्ने की खेती करते थे लेकिन लागत के सापेक्ष गन्ना मूल्य कम निर्धारित होना, समय से गन्ना मूल्य का भुगतान न होना, तौल में पारदर्शी व्यवस्था न होने से किसान गन्ना की खेती से दूरी बनाते जा रहे हैं।
आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो वर्ष 2013-14 में 11459 हेक्टेयर गन्ना का रकबा था। अब वर्ष 2022-23 में 6559 हेक्टेयर तक सिमट गया है। वर्ष 2022-23 के पेराई सत्र में कुल 15 लाख 33 हजार क्विंटल चीनी मिल में गन्ना की तौल कराई थी। कुल 52 करोड़ 44 लाख 30 हजार रुपया गन्ना मूल्य का भुगतान मिल प्रशासन द्वारा किसानों के खाते में कर दिया गया है। बीते पेराई सत्र का मिल प्रशासन ने किसानों के पूरा भुगतान कर दिया हैं।इस संबंध में किसान नेता राकेश सिंह का कहना है कि लगभग एक दशक पूर्व हर किसान नगदी फसल के रूप में गन्ने की खेती करता था लेकिन गन्ना खरीद में पारदर्शी व्यवस्था न होने से किसानों को गन्ना की खेती में नुकसान होने लगा। घाटे का सौदा होने के चलते किसान गन्ना की खेती से परहेज कर रहा है।
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इसी क्रम में मधुबन देवारा क्षेत्र के रविंद्र प्रसाद, श्रीकृष्ण यादव का कहना था कि पहले किसानों को गन्ना भुगतान के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता था। अब गन्ने का भुगतान कब होगा उन्हें खुद इस बात का पता नहीं होता है। पर्ची वितरण में दलालों का बोलबाला है। किसानों को गन्ना तौल कराने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। काफी नुकसान होने के चलते गन्ना का रकबा कम होता जा रहा है।

वर्ष रकबा हेक्टेयर में
2013-14 -11459
2014-15 -10984

2015-16 -9641

2016-17 -8406

2017-18 -9564

2018-19 -9857

2019-20 -9562

2020-21 -8963

2021-22 -6163

2022-23- 6559



कोट
बाढ़ के चलते गन्ने का रकबा कम हुआ है। गत वर्ष के बकाए का भुगतान किसानों के खाते में कर दिया गया है। गन्ना किसानों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से कराए जाने का प्रयास जारी है। - डॉ. विनय प्रताप सिंह, मुख्य गन्ना अधिकारी, चीनी मिल घोसी
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