मऊ। सरकार की तरफ से गरीबों के कल्याण के लिए शुरू की गई जनकल्याणकारी योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नही हो रहा है। शासन की तरफ से वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 10990 आवास बनने का लक्ष्य दिया गया था। जबकि 4860 आवास ही पूर्ण हो पाया है। जबकि 2021-22 में 4622 आवास बनाने का लक्ष्य दिया गया है। विभाग की तरफ से 4050 आवास स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन निर्माण कार्य की गति धीमी चल रही है। अमर उजाला ने 25 जुलाई के अंक में लक्ष्य 11 हजार मकान का बने सिर्फ पांच हजार आवास शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले को संज्ञान में लेते हुए पीडी ने समीक्षा में लापरवाही मिलने पर छह ब्लाकों के 37 ग्राम विकास अधिकारियों का दो माह का वेतन रोका है।
केंद्र सरकार की तरफ से गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शुरू की गई है। इसके तहत पहली किश्त 40 हजार, दूसरी किश्त 70 हजार तथा तीसरी किस्त 10 हजार रुपया देने का प्राविधान है। विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैए से योजना धरातल पर उतारी नहीं जा सकी है। जिले में 2020-21 में पीएम आवास योजना ग्रामीण के तहत 10990 लाभार्थियों को आवास आवंटित किया गया। 10932 लाभार्थी को पहली किश्त, 10641 लाभार्थी को दूसरी किश्त और 7002 लाभार्थी के खाते में तीसरी किश्त भेजी गई हैं। लेकिन 16 माह बाद भी अभी तक मात्र 4860 लाभार्थियों का ही आवास पूरा किया जा सका है।
वर्ष 2021-22 में 4622 आवास का लक्ष्य दिया गया। विभाग की तरफ से 4050 आवास स्वीकृत किया गया। लेकिन अभी तक निर्माण प्रगति धीमी चल रही है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद परियोजना निदेशक ने विभागीय समीक्षा किया। समीक्षा में परदहां, बडरांव, फतेहपुर मंडाव, रतनपुरा, घोसी, कोपागंज ब्लाक सहित छह ब्लाकों की प्रगति अत्यंत खराब मिली। लापरवाही मिलने पर पीडी ने छह ब्लाकों के 37 ग्राम विकास अधिकारियों का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। पीडी ने योजना में प्रगति नहीं होने पर निलंबन की भी चेतावनी दिया है। लाभार्थियों को नोटिस जारी की जा चुकी है। आवासों का निर्माण पूर्ण न होने पर लाभार्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी, पंचायत सचिवों का वेतन रोका गया है।