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बंद रहीं दवा की दुकानें, मरीज परेशान

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शहर में गाजीपुर तिराहे पर प्रदर्शन करते दवा व्यापारी। अमर उजाला - फोटो : mau
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दवा व्यापार में ई-फॉर्मेसी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 28 अगस्त को जारी ड्रॉफ्ट के विरोध समेत अन्य मांगों के समर्थन में दवा व्यापारियों ने जिले में शुक्रवार को दुकानें बंद रखीं। बाइक रैली निकालते हुए शहर के मुख्य मार्गो से होते हुए वह कलेक्ट्रट पहुंचे और पीएम को संबोधित तीन सूत्री मांग पत्र सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा।
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ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के आह्वान पर दवा व्यापार वेलफेयर सोसायटी के बैनर तले बंद का जिले में असर देखने को मिला। शुक्रवार की सुबह से दुकाने बंद होने से  मरीज और तीमारदार दवा लेने के लिए बाजारों में भटकते रहे। वहीं, सरकारी और निजी अस्पतालों में दवा लेने के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ी। अधिक भीड़ और अव्यवस्था के चलते सरकारी अस्पताल में तो कई जगह मरीज बिना दवा लिए लौट गए। इससे पहले मऊ दवा व्यापार वेलफेयर सोसायटी जिलाध्यक्ष शिवजी राय, प्रवीण पांडेय, गोपाल कृष्ण बरनवाल, नरेंद्र बरनवाल,  जमील अंसारी,  इशरत इकबाल लारी, अरविंद पांडेय, ओमप्रकाश गुप्ता, निर्भय पाण्डेय, बृजेश गुप्ता, रवि सिंह, हीरू, पंकज अग्रवाल, शिव अग्रवाल, राकेश पांडेय, सौरभ राय, सतीश गुप्ता, तारीक अंसारी, सकील सहित सैकड़ों दवा व्यापारियों ने सिंधी कालोनी स्थित दवा मार्केट से बाइक रैली निकाली।

जो बाल निकेतन, रोडवेज, आजमगढ़ मोड़, गाजीपुर तिराहा, होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। जहां जिलाध्यक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट को तीन सूत्री मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। बंद को यू.पी.एम.एस.आर. एम,  घोसी संघर्ष समिति, उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का भी समर्थन मिला। व्यापारियों का कहना है कि ई-फॉर्मेसी को बढ़ावा देने से इसका असर सीधे मरीजों पर पड़ेगा। लोग गलत दवाएं मंगा लेंगे। जांच के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी। उधर, दुकानें बंद होने से परेशान लोगों की भीड़ सुनसान रहने वाले प्रधानमंत्री औषधि केंद्रों पर जहां देखने को मिली। वहीं सदर अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर आम दिनों के अपेक्षा भीड़ ज्यादा रही।
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