घाघरा नदी के तटबंध से दक्षिणी क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बनाई जा रही दीवार में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने निर्माण रुकवा दिया। अवर अभियंता ने स्वीकार किया कि गलती से तीसरे दर्जे की ईंट आ गई थीं। उसे वापस कर अव्वल दर्जे की ईंट मंगाई जाएगी। इसके बाद गुणवत्तापरक निर्माण कराया जाएगा। जेई के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए।
सिंचाई विभाग की ओर से पौने दो करोड़ रुपयों की लागत से फतेहपुर मंडाव विकास खंड क्षेत्र के परसिया जयराम गिरि से हाहानाला तक बंधे के उत्तरी तरफ पक्की दीवार का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस दीवार में तीसरे दर्जे की ईंट का प्रयोग किया जा रहा था।
सीमेंट और बालू का अनुपात भी काफी घटिया है। लाल बालू की जगह पास से ही सफेद बालू सीमेंट में मिलाया जा रहा था। गांव वालों ने इसकी सूचना जेई सहित उच्चाधिकारियों से की थी। लेकिन ग्रामीणों की शिकायत पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दिए और निर्माण कार्य पूर्ववत चलता रहा।
शनिवार को आस पास के गांवों के काफी ग्रामीण एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने निर्माण स्थल पर मौजूद मेठ से निर्माण रोकने का अनुरोध किया लेकिन वह विभागीय अधिकारी के ही निर्देश पर काम रोकवाने की बात कहता रहा। मेठ की बात सुनकर ग्रामीणों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना था कि विभाग द्वारा यह जो घटिया निर्माण कराया जा रहा है, वह उफनती घाघरा नदी की एक भी धारा का दबाव नहीं रोक पायेगा।
इसी बीच किसी ने अधिशासी अभियंता को फोन कर घटिया निर्माण रोकवाने की मांग किया। इधर ग्रामीणों का उग्र तेवर देख मेठ ने निर्माण कार्य रोकवा दिया। ग्रामीणों ने चेताया कि यदि गुणवत्ता परक निर्माण नहीं कराया गया तो वे फिर आंदोलन के लिए विवश होंगे। इस संबंध मे जेई कमलेश यादव का कहना है कि निर्माण मे गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है।