शहर के मलिक टोला मोहल्ले में मुहर्रम की आठवीं तारीख को मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें मौलाना मुहर्रम अली ने लोगों को संबोधित किया।
मजलिस में मौलाना मुहर्रम अली ने कर्बला के वाकयों पर रोशनी डाली। मौलाना ने अपनी तकरीर में इमाम हुसैन के 18 वर्षीय जवान बेटे जनाबे अली अकबर (अ.स.) की शहादत का दर्दनाक मंजर बयान किया। उन्होंने कहा कि जनाबे अली अकबर की शहादत कर्बला के सबसे बड़े मसायब (दुखों) में से एक है।
शहादत का जिक्र सुनकर मजलिस में मौजूद अकीदतमंद फूट-फूटकर रोने लगे। मजलिस और ताजिया बरामदगी के बाद पूरा माहौल ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंज उठा।
इस मौके पर मशहूर अंजुमन बाबुल इल्म जाफरिया के मर्सियाख्वानों और नौहाख्वानों ने बेहद पुरदर्द अंदाज में नौहाख्वानी व सीनाज़नी की। अंजुमन के सदस्यों और स्थानीय युवाओं ने पूरी अकीदत के साथ सीनाज़नी कर कर्बला के शहीदों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया।
इस दौरान आठवीं मुहर्रम का यह ताजिये का जुलूस अपने पारंपरिक रास्तों से होकर गुजरा। इस अवसर पर मुख्य रूप से ताजियेदारों व मुतवल्ली सैय्यद अली अंसर, आसिफ रिजवी, मंसूर शुजात अली, आजम, अयान, आमान, फैजी, मिजान, तामीर, जहीर, मासूम रजा और जावेद मौजूद रहे।