मऊ। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आभा कार्ड बनाने की रफ्तार काफी धीमी है। 18 माह में 45 फीसदी लोगों के ही आभा कार्ड बन पाए हैं। इस लापरवाही के लिए 200 आशाओं को चेतावनी पत्र जारी किया गया। वहीं कर्मचारियों का तर्क है कि लोगों के आधार कार्ड मोबाइल नंबर से लिंक न होने या नंबर बदल लेने के कारण कार्ड बनाने में देरी हो रही है।
जिले के नौ ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आने वाले सभी मरीजों का स्टाफ की ओर से आभा कार्ड बनाया जा रहा है। इसको लेकर 150 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर और 2000 आशा की ओर से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत आभा कार्ड में हर व्यक्ति का स्वास्थ्य खाता तैयार किया जा रहा है। इसमें व्यक्ति के स्वास्थ्य का पूरा रिकाॅर्ड रहेगा। जिले में 18 महीनों में केवल 10 लाख आभा कार्ड बन पाए हैं। आकंड़ों पर गौर करें तो विभाग की ओर से यह कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। जिले में 22 लाख की आबादी का आभा कार्ड बनना है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अधिकतर लोगों के आधार कार्ड मोबाइल नंबर से लिंक न होने के कारण आभा आईडी नहीं बन पा रही है। जिन लोगों के आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक है, उन्होंने अपने नंबर बदल लिए हैं। ऐसे में ओटीपी पुराने नंबर पर जाता है। ओटीपी मिलने के बाद ही आभा आईडी जनरेट होती है।
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जानिए क्या है आभा कार्ड
आभा कार्ड को हेल्थ आईडी कार्ड कह सकते हैं। यह डिजिटल कार्ड होता है। इसमें संबंधित व्यक्ति का मेडिकल रिकॉर्ड रहता है। कब बीमार हुए, क्या इलाज चला, किस डॉक्टर को दिखाया, बीमारी से संबंधित कौन-कौन से टेस्ट हुए, कौन-कौन सी दवाइयां लिखी गईं आदि रिकॉर्ड दर्ज होते हैं। आभा आईडी बनने से आपको पर्चे संभालकर रखने की जरूरत नहीं है। इस कार्ड की मदद से पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। अगर आप कभी बीमार होते हैं। डॉक्टर के पास जाते हैं, तो डॉक्टर आपकी आभा आईडी से पुराने इलाज का पता कर उपचार शुरू कर देंगे।
कोट
आभा कार्ड बनाने के लिए अलग-अलग विभागों को कार्य सौंपा गया है। एनसीडी में जो लोग इलाज के लिए आते हैं, उनका कार्ड बना दिया जाता है। जिले में शिविर लगाकर भी कार्ड बनाए जा रहे हैं। 10 लाख लोगों के आभा कार्ड बनाए जा चुके हैं। लोगों से अपील है कि आधार कार्ड को मोबाइल नंबर से लिंक करा लें, ताकि सभी का समय रहते आभा कार्ड बन सके।
- डॉ. बीके यादव, नोडल अधिकारी और डिप्टी सीएमओ मऊ