मऊ। कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ के बीच सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर व अन्य स्टाफ की मनमानी जारी है। मंगलवार को जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल का लाइव कवरेज के दौरान यह मनमानी सामने आई। जहां ओपीडी समय के काफी देर बाद भी कई चिकित्सकों के चेंबर चिकित्सक विहिन नजर आए, वहीं इन चेंबर के बाहर मरीजों की भीड़ दिखी जो कि जिले के दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों से सुबह की ठंड में इलाज कराने पहुंचे थे। हालांकि भले ही चिकित्सक ओपीडी समय पर अपने चेंबर पर नहीं बैठे हो, लेकिन ओपीडी समय से पहले उठना नहीं भूले।
मंगलवार की सुबह 11.28 बजे की पड़ताल में जिला अस्पताल में काफी संख्या में मरीज चिकित्सकों के चेंबर के बाहर खड़े दिखे। शिशु और बाल रोग विशेषज्ञ के कमरा संख्या तीन में ताला लटका रहा। वहीं कमरा संख्या एक में एमडी मेडिसीन डा. अनिल कुमार अपने चेंबर में नहीं दिखे। जबकि उनका एक सहायक लोगों का नंबर लगाता दिखा। वहीं कमरा नंबर तीन में नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ एम.एस ईएनटी डा. सौरभ त्रिपाठी नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ के चेंबर में भी ताला लटका रहा।
मरीज बाहर बैठकर उनका इंतजार करते दिखे। वहीं प्रथम तल पर वरिष्ठ नेत्र सर्जन डा. एमके पांडेय अपने चेंबर से नदारत रहे। वहीं महिला अस्पताल की पड़ताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ स्वाति गुप्ता अपने चेंबर में नहीं थीं वहीं मरीज बाहर उनका इंतजार करते दिखे। हालांकि जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में हर रोज सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन चिकित्सकों की लेट लतीफी के कारण काफी परेशान होना पड़ता है।
बंद अल्ट्रासाउंड की सुविधा, बढ़ रही हैं मरीजों की परेशानी
मऊ। महिला जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से यहां अल्ट्रासाउंड की जांच बीते दो वर्ष से अधिक समय से बंद है। इसके चलते यहां आनी वाली गर्भवती महिला मरीजों को चिकित्सकों के परामर्श के बाद जांच कराने के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। पहले से चिकित्सकों की कमी झेल रहे अस्पताल उस पर से चिकित्सकों द्वारा समय से न बैठने के बीच जांच की सुविधा भी न होने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है।
सीएमओ डॉ. श्याम नारायण दूबे ने बताया कि अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्थाएं दी गई है, मानव संसाधन की कमी को दूर करना प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही अस्पतालों का औचक निरीक्षण कर लापरवाही बरतने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।