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शास्त्र और शस्त्र भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग : श्रीप्रकाश

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शास्त्र और शस्त्र भारतीय संस्कृति एवं अस्मिता के अभिन्न अंग हैं। ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बलिया विभाग के प्रचारक श्रीप्रकाश ने शनिवार की देर शाम एक मैरिज हाल में आयोजित शस्त्र पूजन समारोह में कहीं।
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उन्होंने कहा कि विजयदशमी के दिन ही डॉ .हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। इसी दिन राम ने रावण पर विजय प्राप्त कर संपूर्ण विश्व में धर्म ध्वजा फहराई थी। यह पर्व संपूर्ण विश्व को यह संदेश देता है कि मानवता की रक्षा तथा मानवीय मूल्यों की रक्षा हम सब का मूल उद्देश्य होना चाहिए। इसीलिए आरएसएस विजयदशमी के पर्व को उत्सव के रूप में मनाता है और शस्त्र पूजन करता है। कहा कि व्यक्ति को शक्ति के साथ विनम्रता एवं सहनशीलता का भी आवरण रखना चाहिए। वर्ष 2025 में यानि चार वर्ष बाद संघ अपना शताब्दी वर्ष मनाएगा। हमारा प्रयास होगा कि प्रत्येक गांव नगर एवं व्यक्ति तक संघ की विचारधारा पहुंचे इसी माध्यम से हम भारत को पुन: विश्व गुरु के आसन पर विराजमान कर अपना सपना पूर्ण कर सकते हैं। इस अवसर पर सह जिला कार्यवाह वीरेंद्र, खंड कार्यवाह सुनील, ओमप्रकाश सिंह रहे। अध्यक्षता विभाग प्रचारक रामप्रताप ने की।
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