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सावन माह का दूसरा सोमवार: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया भगवान शिव का जलाभिषेक

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सावन के दूसरे सोमवार को नगर के गायघाट स्थित भगवान भोलेनाथ का पूजन अर्चन करतीं युवतियां। - फोटो : MAU
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मऊ। सावन माह के दूसरे सोमवार को नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में श्रद्धालुओं ने घरों पर ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का जलाभिषेक किया। बेलपत्र और दूध आदि चढ़ा कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। परिवार की तरक्की के लिए मन्नत मांगी। कई शिव मंदिरों पर भक्तों ने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजन अर्चन किया। इस मौके पर हर-हर महादेव के जयकारे से वातावरण गूंज उठा। इस बीच लोगों ने पूरे दिन भगवान का व्रत रखा।
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देवाधिदेव महादेव के अतिप्रिय सावन माह में साधना करने से साधक एवं भक्तों को सिद्धि प्राप्ति होती है। मनोकामनाएं पूरी होती है। इसी मान्यता के तहत सावन के दूसरे सोमवार के मौके पर तड़के से ही भगवान शिव का पूजन अर्चन करने का क्रम शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने घरों में ही विधि विधान से भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन अर्चन किया। वहीं नगर के पक्का पोखरा शिवमंदिर, गाजीपुर तिराहा स्थित शिव मंदिर, कतुआपुरा शिवाला, मठियाटोला शिवमंदिर, हनुमानघाट, भीटी स्थित शिवमंदिर, पावरहाउस कालोनी स्थित शिवमंदिर, बालनिकेतन मोड़ स्थित शिवमंदिर और कैलाशपुरी सहित विभिन्न मंदिरों पर कुछ भक्तों ने भगवान शिव का सोशल डिस्टेंसिंग के साथ जलाभिषेक किया।



बढुआगोदाम/ पिपरीडीह: सावन के दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं ने क्षेत्र के बढुआगोदाम, डुमरांव, सिंधी बाबा की कुटी, कहिनौर, पिपरीडीह, उस्मानपुर, खरगजेपुर, भार, रैकवारडीह सहित विभिन्न गांवों में स्थित शिव मंदिरों में स्थापित शिवलिंग पर सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए बेलपत्र, अक्षत, दूध आदि से भगवान शंकर का पूजन अर्चन किया। श्रद्घालुओं के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।
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दोहरीघाट: सावन के दूसरे सोमवार को शिवभक्तों ने विधि विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक किया। हर मंदिरों पर पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था रही। गोठा झारखंड शिवलिंग, पातालनाथ, पत्तनई गौरीशंकर मंदिर, महादेव मंदिर सहित आदि शिवालयों के मुख्य गेट पर पुलिस तैनात रही। भक्तों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए एक एक कर मंदिरों में जल चढ़ाने की अनुमति देती रही। वहीं भक्त बेलपत्र, धतुरा, भांग, दही, घी, फूल, अगरबत्ती, दूध, ईख आदि का पूजन सामग्री के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजन अर्चन किया। कई मंदिरों के पुजारियों ने मंदिरों में पूजा पाठ कर गर्भगृह में ताला बंद कर दिया। उसके बाद भी शिव भक्तों ने मंदिरों के चौखट की पूजा कर अपनी मन्नत मांगी।
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