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सरयू नदी का जलस्तर स्थिर, खतरा बरकरार

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दोहरीघाट/दुबारी (मऊ)। नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद कई दिनों से सरयू नदी के जलस्तर हो रही वृद्धि के बाद सोमवार को जलस्तर स्थिर होने से नगर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस जरूर ली, लेकिन अभी भी खतरा बरकरार है। नदी खतरा बिंदु से 45 सेमी ऊपर बह रही थी। मुक्तिधाम स्थित भारत माता मंदिर की सुरक्षा में रखे बोल्डर के खिसकने तथा कटान का खतरा बढ़ गया है। वहीं मधुबन तहसील क्षेत्र के हाहानाला पर सरयू नदी खतरा बिंदु से पांच सेमी ऊपर होने से नदी का पानी तटवर्ती इलाकों में घुस गया है। संपर्क मार्ग डूब गए हैं। देवारा क्षेत्र के कई गांव नदी के घेरे में आ गए हैं। लोग जान जोखिम में डालकर आने-जाने को विवश हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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सरयू नदी के उग्र होने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही हैं। नदी की लहरें भारत माता मंदिर की दीवारों से टकरा रही है। इससे मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाकबंगला, शाही मस्जिद सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरा मंडराने लगा है। ऐतिहासिक धरोहरों पर कटान का खतरा बना हुआ है। वही तटवर्ती इलाकों में खेतों में पानी घुसने से हजारों एकड़ फसल नष्ट होने के कगार पर है। पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। नदी का जलस्तर सोमवार को 70.35 मीटर रहा। जबकि रविवार को नदी का जलस्तर 70.35 मीटर था। नदी अभी भी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 45 सेमी ऊपर बह रही थी।
मधुबन तहसील क्षेत्र से होकर गुजरी सरयू नदी का जलस्तर खतरा निशान से पांच सेमी ऊपर रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। परसिया जयराम गिरी हाहा नाला पर जलस्तर 66.36 मीटर पर रहा। खतरा निशान 66.31 मीटर से पांच सेमी ऊपर बह रही थी। नदी के खतरा बिंदु से पांच सेमी ऊपर बहने के कारण तटवर्ती क्षेत्र में पानी घुसने लगा है। कई मुख्य मार्ग डूब गए हैं। कई सरकारी एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों के कैंपस में बाढ़ का पानी भर गया है। फसलों के जलमग्न होने से पशुओं को लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। तैयार हुई धान के फसल के नुकसान होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। क्षेत्र के चक्कीमुसाडोही, बरोहा, जरलहवा, खैरा टाडी़, बिशुन का पुरा, सुन्नर का पुरा, धूस का पुरा, मनमन का पुरा, हरिलाल पुरवा, हाता, लीलहवा, भगत का पुरा, नंद का पुरा, पब्बर का पुरा, बिंटोलिया, नई बस्ती नदी के घेरे में आ गए हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से नाव की व्यवस्था न होने के चलते लोग जान जोखिम में डालकर आने जाने को विवश हैं।
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