मऊ। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भाकपा नेता, पूर्व सांसद और शहीद-ए-उर्दू कामरेड जयबहादुर सिंह की पुण्यतिथि पर सोमवार कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भाकपा जनों और वाम दलों के लोगों ने उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा कि जयबहादुर सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में संघर्षपूर्ण भागीदारी तथा जमींदारों के जुल्म के खिलाफ उनके बलिदानी संघर्षों को को याद किया। उन्होंने कहा कि कामरेड जयबहादुर सिंह ने आजीवन शोषितों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों, तथा छोटे किसानों के हितों के लिए संघर्ष किया।
पूर्व विधायक इम्तेयाज अहमद ने कहा कि उन्होंने उर्दू भाषा को तीसरी राजकीय भाषा के रूप में स्थापित करने के संघर्ष में अपनी जीवन की कुर्बानी दे दी। तभी से जनता आज भी उन्हें शहीद-ए उर्दू के खिताब से नवाजती है। भाकपा के जिलामंत्री रामसोच यादव ने देश के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य की चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा अर्द्ध फांसीवादी एकाधिकारी सत्ता एवं निजाम के खिलाफ देश के मजदूर, किसान व शोषित दलित देश में आक्रोशित हैं तथा सरकार के दमन चक्र को झेलते हुए अपने संघर्षों को आगे बढ़ा रहे हैं।
सभा को विनोद राय, महिला फेडरेशन की नेता मनोरमा देवी, भाकपा माले के नेता रामनवल सिंह, एटक नेता श्रीराम सिंह, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन जिलाध्यक्ष सुबाष गौतम, अनीस अहमद अंसारी, फखरे आलम, रामअवतार सिंह, रामकुमार भारती, रामनरायन सिंह ने उनके व्यक्तित्व को कृतित्व को याद किया। इस अवसर पर श्यामबहादुर चैहान, रामनारायन सिंह, हेसामुद्दीन, रामकुमार भारती, विष्णु देव गुप्ता, उजपाती राजभर, सीताराम यादव, रामजन्म राजभर, छविलाल शर्मा, जयप्रकाश राम,अतवारी देवी, फुलमती देवी, शमशुद्दीन नेता, सुग्गन यादव, श्यामबहादुर चौहान, शिवमूरत गुप्ता, विनोद राय, छविनाथ शर्मा, बंधु राम आदि उपस्थित रहे।