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लगातार दो माह की बंदी से दम तोड़ रहा सैलून कारोबार

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मऊ। कोरोना के चलते लगातार दो माह से अधिक समय से सैलूनों के बंद रहने से सैलून का कारोबार दम तोड़ रहा है। इसके चलते सैलून संचालकों तथा कारीगरों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। राष्ट्रीय नाई महासभा के पदाधिकारियों ने सैलून खोलने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है।
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जिले में दो हजार से अधिक सैलून हैं। जिसमें लगभग 10 हजार से अधिक कारीगर काम करते हैं।
लगातार दो माह से अधिक समय से सैलून के बंद रहने से सैलून संचालकों तथा कारीगरों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। चौथे चरण के लाकडाउन में जिला प्रशासन की तरफ से रोस्टर के हिसाब से दुकान खोलने के लिए फरमान जारी किया गया है, लेकिन सैलूनों को खोलने के लिए रोस्टर ही नहीं बन सका है। सैलून खोलने की अनुमति न मिलने से लोग भी कोरोना के भय से सैलून पर नहीं जा रहे हैं। लगातार बंदी से सैलून कारोबार अब दम तोड़ने लगा है। सैलून संचालकों की मानें तो रोस्टर के हिसाब से सभी दुकानें खुल रही हैं तो उन्हें भी प्रशासन की ओर से अनुमति मिलनी चाहिए। लेकिन अभी तक कोई दिशा निर्देश नहीं मिलने से वे रोजी रोटी के लिए जूझ रहे हैं।
राष्ट्रीय नाई महासभा के जिलाध्यक्ष दिनेश शर्मा एडवोकेट ने कहा कि लगातार दो माह से अधिक समय से सैलूनों के बंद होने से सैलून संचालकों तथा कारीगरों के समक्ष भूखमरी जैसे हाल हो गए हैं। सप्ताह में तीन दिन सैलून खोलने का रोस्टर जारी किया जाए।
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पार्लर संचालक धीरज अग्रवाल का कहना है कि जिला प्रशासन की तरफ से रोस्टर के हिसाब से जरूरी दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई है। ऐसे में सैलून को भी पूरी सुरक्षा तथा सतर्कता के साथ खोलने की अनुमति मिलनी चाहिए।
ब्यूटी पार्लर संचालिका पुष्पा जायसवाल का कहना है कि लगातार चार चरण के लाकडाउन लागू रहने से पार्लर बंद चल रहा है। जिला प्रशासन को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए पार्लर सैलून खोलने की अनुमति देनी चाहिए।
सैलून संचालक ओमप्रकाश ठाकुर ने कहा कि लॉकडाउन से सैलून बंद चल रहे हैं। जिला प्रशासन की तरफ से न तो अब सहायता राशि उपलब्ध कराया गया और न ही सैलून खोलने की अनुमति दी जा रही है। नियमों के साथ सैलून खोलने की इजाजत दी जानी चाहिए।
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कारीगर लल्लन शर्मा का कहना है कि सैलून बंद रहने से काम नहीं मिल पा रहा है। सुरक्षा और सफाई के साथ सैलून को खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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