जिले में गर्मी, उमस और बारिश के बीच बदलते मौसम का असर लोगों की त्वचा पर भी दिखाई देने लगा है। जिला अस्पताल की त्वचा रोग (डर्मेटोलॉजी) ओपीडी में एलर्जी, खुजली, लाल चकत्ते, फंगल संक्रमण और त्वचा में जलन की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
बीते तीन वर्ष से यहां त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने से आधे से अधिक मरीज निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जबकि आधे मरीज मजबूरी में अन्य रोगों के डॉक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
बृहस्पतिवार को 70 से अधिक मरीज यहां पहुंचे, जो अत्यधिक पसीना, नमी और त्वचा की सफाई में कमी के कारण इस मौसम में त्वचा संबंधी समस्याओं को लेकर आए थे।
इसमें दुबारी के रमेश ने बताया कि वह एक्जिमा की समस्या लेकर पहुंचे थे, लेकिन अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ न होने पर उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा।
वहीं, गाजीपुर जिले के मरदह निवासी सोनू ने बताया कि डर्मेटाइटिस की समस्या होने पर वह पास में जिला अस्पताल होने के कारण पहुंचे थे, लेकिन पता चला कि कई साल से इस बीमारी के डॉक्टर नहीं हैं।
वहीं, इनमें से अधिकांश मरीजों ने मौजूद फिजिशियन डॉ. शैलेष कुशवाह से इलाज कराया। बताते चलें कि यहां तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एके रंजन का चार वर्ष पूर्व तबादला होने के बाद से अब तक यहां किसी चर्म रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है।
वहींं, इन दिनों पहले गर्मी, बारिश और फिर धूप के बाद बदलते मौसम से बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में भी एलर्जी और संक्रमण की समस्या बढ़ रही है।
उधर, सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती की मांग को लेकर शासन को पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही है कि गर्मी और बारिश के बीच का मौसम त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए अनुकूल माना जाता है।
इस दौरान पसीना अधिक आने और वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में इन बीमारियों के मरीजों की संख्या का ग्राफ भी बढ़ा है।
बचाव के उपाय
त्वचा को साफ और सूखा रखें।
सूती और ढीले कपड़े पहनें।
अधिक पसीना आने पर कपड़े बदलें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
किसी भी एलर्जी या संक्रमण के लक्षण दिखने पर त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।