महासो के मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर हुए
रेल हादसे के बाद घटनास्थल पर बच्चों की बिखरी किताबें और उनके जूते घटना
की भयावहता बयां कर रहे हैं। दूसरे दिन लोग बच्चों की किताबों को निहार रहे
थे,
उनके जूते देखकर सिहर जा रहे थे। मैजिक वाहन के क्षतिग्रस्त सामान भी
इधर उधर बिखरे हैं। कई जगहों पर खून के धब्बे दिखे। उधर, गांव में माताएं
अपने बच्चों के कपड़े, किताबें आदि
सामान हाथ में लेकर करुण क्रंदन करती
रहीं। वे अपने ‘लाल’ को उनसे जुड़ी वस्तुओं में ही ढूंढती रहीं। पिता
बेसुध दिखे, परिवारवालों का दुख असहनीय दिखा।
रेल हादसे में
मरे एवं घायल बच्चों के गांव में घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को आबोहवा में
शोक और गम महसूस किया गया। कुछ सुनाई भी दिया तो माताओं, बहनों का करुण
क्रंदन।
हाथों में बच्चों के कपड़े इत्यादि लेकर वे लगातार उन्हें यादकर
रोई जा रही हैं। पीड़ित परिवार की महिलाओं एवं पुरुषों का हाल यह है कि
मासूमों की याद में उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे। कई महिलाएं बेहोश हो
गईं। मृतक बच्चों के परिवार में उनके नात रिश्तेदारों के आने के बाद माहौल
गमगीन हो जा
रहा है। गांव में वैसे तो स्यापा पसरा हुआ है लेकिन कोई चीर
परिचित जब आ रहा है, तो बच्चों के घर के सदस्य रो पड़ रहे हैं। घर की
महिलाएं एवं बच्चों की मां तो बेहोश हो जा रही हैं। उनकी आंखों से आंसू
नहीं रुक रहे । सिर्फ पीड़ित परिवार ही नहीं बल्कि गांव के अन्य परिवार के
लोग
भी उनके इस हृदय विदारक क्रंदन पर अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं।
गांव में हर घरों में बस रेल हादसों में मरे बच्चों के साथ ही घटना की ही
चर्चा हो रही है। कोई इसके लिए चालक को दोष दे रहा है तो कोई किस्मत
को। गांव के जिस परिवार के बच्चे इस घटना से संबंधित नहीं हैं,
वे परिवार
भी गमगीन माहौल में ही अपने दैनिक कार्यों को निपटा रहे हैं। रिश्तेदारों
का गांव में हर किसी के घर फोन आ रहा है कि उनके घर के बच्चे सुरक्षित हैं
कि नहीं।
बता दें कि डीडी कान्वेंट स्कूल की मैजिक वाहन का चालक मानव रहित
क्रासिंग पार करने के प्रयास में तमसा ट्रेन से टकरा गया। इस घटना में
सुंदर, कृष्ण कुमार, कृष्णा कुमारी, आयुष,
शिवांगी और साहिल नाम के बच्चों
की मौत हो गई। जबकि चालक सरविंद, बालिका खुशी, नामन, शिवम, अनुष्का, रोली,
विशाल आदि गंभीर रूप से घायल हा गए हैं।