मऊ। अब 15 वर्ष पुराने वाहनों का फिर से रजिस्ट्रेशन कराना महंगा हो गया है। इसके साथ ही फिटनेस और टैक्स भी खासा बढ़ा है। पर्यावरण में फैले प्रदूषण को कम करने तथा पुराने वाहनों की संख्या सड़क से कम करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। शुक्रवार से यह नियम प्रभावी कर दिया गया है।
जिले में 15 वर्ष पुराने वाहनों की संख्या आठ माह पूर्व 29 हजार के करीब थी। लेकिन काफी लोगों ने अपने पुराने वाहनों का फिर से पंजीकरण कराया है। वर्तमान में जिले में कुल 27 हजार के करीब वाहन 15 वर्ष या उससे पुराने हैं। सवारी बसों का 15 वर्ष के बाद तथा स्कूली बस का 20 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं होता जबकि आटो रिक्शा का 10 वर्ष बाद परमिट और फिटनेस नहीं होता। एक अप्रैल से 15 वर्ष पुराने वाहनों का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने पर आठ गुना फीस देय है। अभी तक 15 वर्ष पुराने निजी कार का दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने की फीस 600 रुपये, कामर्शियल वाहन की1000 और पुराने दो पहिया वाहन की 300 रुपये लगती थी। अब दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आठ गुना अधिक फीस देनी होगी। इसके साथ ही फिटनेस फीस में भी बढ़ोत्तरी की गई है। यह नियम पुराने वाहनों की संख्या कम करने के लिए लागू किया गया है। एआरटीओ प्रशासन रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पुराने वाहनों के दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने के नए नियम एक अप्रैल से लागू हुए हैं। 15 वर्ष पुराने वाहन की पुन: रजिस्ट्रेशन फीस, फिटनेस और टैक्स फीस में भी बढ़ोत्तरी की गई है।