मऊ। रोडवेज की बसों को गांवों की सीमाओं तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई लोहिया वाहिनी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण रूटों पर संचालित किए जाने वाली बसों का संचालन लंबी दूरी की रूटों पर किए जाने से यात्रियों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जबकि मऊ डिपो प्रबंधन चालकों और परिचालकों की कमी का रोना रो रहा है।
मऊ डिपो से संचालित 53 बसों में महज 28-30 बसों का ही संचालन सुनिश्चित हो रहा है। डिपो से गाजीपुर छोड़कर वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, बलिया, गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ आदि रूटों पर संचालन हो रहा है। जिले में लोहिया वाहिनी की 12 बसें हैं, जिनका संचालन ग्रामीण रूटों के बजाए लखनऊ के लिए किया जा रहा है। चालकों की कमी बसों के संचालन में रोड़ा बन रहा है। 112 चालकों के सापेक्ष महज 78 ही चालक हैं। 34 चालकों तथा 35 परिचालकों की कमी के कारण बसों का संचालन प्रभावित है। वहीं नगर के ताजोपुर स्थित रोडवेज के वर्कशाप में काफी बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। मऊ डिपो से चिरैयाकोट के लिए बसों का संचालन नियमित न होने से लोगों को आवागमन के लिए प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं खुरहट रानीपुर-चिरैयाकोट रूट, रतनपुरा-भीमपुरा रूट सहित कई रूटों पर बसों का संचालन न होने से आम नागरिक और किसानों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोट
ग्रामीण रूटों पर संचालित बसों से संचालन के लिए चालक और परिचालक नहीं मिल रहे हैं। चालकों की कमी के बीच जैसे-तैसे बसों का संचालन विभिन्न रूटों पर सुनिश्चित किया जा रहा है। ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसों का संचालन लंबी दूरी के रूट पर हो रहा है। - रमेश चंद्र, एआरएम, मऊ।