सूखा राहत पाने के लिए किसानों को काफी पापड़ बेलना पड़ रहा है। लेखपालों की मनमानी से किसानों को मानक के अनुरूप राहत नहीं मिल पा रही है। किसानों का आरोप है कि जिन लेखपालों को सुविधा शुल्क दे दिया जा रहा है, वे सूखा राहत की रकम बढ़ा दे रहे हैं।
जो किसान लेखपालों को खुश नहीं कर पा रहे हैं, उनकी राशि घटा दी रही है। लेखपालों के पास इन दिनों काफी भीड़ लग रही है। सरकार ने सूखापीड़ित किसानों को साढ़े तेरह हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सूखा राहत दी जा रही है।
किसानों का आरोप है कि लेखपालों द्वारा कहा जा रहा है कि वह फसल की क्षति का प्रतिशत बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर देगा, बशर्ते उसे कुछ लाभ करा दिया जाय। सुविधा शुल्क ऊपर तक पहुंचाना है।
लेखपालों की मांग को पूरा करने वाले किसान तो लाभान्वित हो जा रहे हैं लेकिन जो किसान लेखपाल से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं उनकी क्षति का प्रतिशत कम करके मामूली रकम स्वीकृत कर दी जा रही है।
चाहे उनकी बरबाद फसल का क्षेत्रफल कितना ही क्यों न हो। इस बारे में किसान नेता राकेश सिंह और देव प्रकाश राय का कहना है कि राहत राशि बढ़ाने के नाम पर लेखपालों द्वारा किसानों का आर्थिक दोहन किया जा रहा है।
लेखपाल नौ बीघा खेत वाले किसानों के नाम से सात हजार रुपये की राहत का आंकलन कर दे रहे हैं जबकि एक बीघा फसल वाले किसान के नाम 27 हजार की राहत । इन किसान नेताओं की शिकायत है कि इस बारे में जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को पत्र देकर लेखपालों की करतूतों को बताया गया लेकिन लेेखपालों पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है।
उधर सूखा राहत प्रभारी अमरनाथ राय का कहना है कि ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित लेखपाल के विरुद्घ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे किसी के भी बहकावे में न आएं और रुपये मांगने वाले लेखपालों के बारे में उन्हें जरूर सूचित करें।