मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण का ग्राफ भले ही कागजों पर सिमटता दिख रहा है, लेकिन अस्पतालों में भीड़ और मरीजों की संख्या देख कर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हकीकत कुछ और है। लोगों ने एकबारगी मरीजों की संख्या में कमी को देख यह सवाल भी उठाया है।
सोमवार को जिले में आई 2059 जांच रिपोर्ट में केवल दस मरीज मिलने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने की है। जबकि बीते दिनों स्वास्थ्य विभाग की निगरानी टीम के चलाए गए विशेष अभियान में रिपोर्ट दी गई थी, कि ग्रामीणांचल में 2600 संदिग्ध मरीज मिले हैं। दूसरी तरफ हो रही ताबड़तोड़ मौतें और भरे प्राइवेट अस्पताल इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं। जबकि सरकारी विभाग के आंकड़ों में अभी मात्र 60 की मौत ही दिखाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के कोरोना मेडिकल बुलेटिन में 31 मार्च 2020 तक संक्रमण की पहली लहर में मौत का आंकड़ा 39 था। वहीं पूरा अप्रैल माह बीतने तथा मई का आधा माह गुजरने के बाद सोमवार को जारी बुलेटिन में विभाग ने 60 मरीजों की मौत की पुष्टि की है। यानी जिले में संक्रमण की दूसरी लहर में शासकीय आंकड़ों के हिसाब से 21 की मौत ही हुई है। यह मौतें शासकीय आंकड़ों की पुष्टि पर है, जबकि जिला अस्पताल में उपचार कराने वाले कई मरीजों की मौत आक्सीजन न मिलने से हुई है। जिसकी गिनती न तो कोविड मरीजों में हुई थी न ही नॉन कोविड मरीजों में है।
कागजों पर गांव में पहुंच रही है मेडिकल टीम
मऊ। संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। इसकी जद में आने से लोगों की मौतें भी हो रही है, लेकिन जांच नहीं होने से यह मौत संक्रमण से हो रही है इसकी पुष्टि नहीं हो रही है। इसका उदाहरण रतनपुरा ब्लाक के रतनपुुरा ग्राम पंचायत में देखा जा सकता है। यहां बीते 29 अप्रैल से 9 मई तक दस से ज्यादा ग्रामीणों की मौत हुई थी। इसमें महिलाएं भी शामिल थीं। चौंकाने वाली बात है कि अब तक मेडिकल टीम ने गांव पहुंचकर लोगों की कोविड जांच नहीं की है।
सीएमओ डॉ. सतीश चंद्र सिंह ने बताया कि जिले में कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर गठित टीमों द्वारा एंटीजन टेस्ट तथा आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। अगर कहीं जांच नहीं हो रही है तो सूचना मिलने पर वहां भी टीम को भेजकर जांच की जा रही है। सकारात्मक बात है बीते कुछ दिनों से जिले में संक्रमण का ग्राफ लगातार कम होता दिख रहा है।