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गोवंश पर राजनीति, विषय का अवमूल्यन

Sat, 21 Nov 2015 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मऊ
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गोवंश केवल आस्था का विषय नहीं, अपितु इससे आर्थिक, वैज्ञानिक, पर्यावरण, कृषि संवर्धन आदि तमाम विषय जुड़े हैं। गोवंश को लेकर वोट की राजनीति करना इस विषय का अवमूल्यन करना होगा। यह बातें गांव बचाओ धरने में शामिल होने आए विचारक व चिंतक केएन गोविंदाचार्य ने कहीं। साथ ही विवाद सुलझाने के लिए संवाद स्थापित करने पर जोर दिया।
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वे अपने कई साथियों सहित गांव बचाओ धरने का समर्थन के लिए जनपद में पहुंचे। ख्वाजाजहांपुर में स्थित एक नर्सिंग होम में प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक धरने के बाद भी यदि जिम्मेदार लोग समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे तो इस संघर्ष को मैराथन की तरह लेना चाहिए।


उसी के अनुरूप रणनीति भी बनानी होगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाकर देश का प्रधान मंत्री बनने से रोक गया।
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लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी ने जिस धैर्य संयम का परिचय देते हुए कई सालों तक कुर्सी से दूर रहते हुए सत्ता की बागडोर संभाली उसकी मैं प्रशंसा करता हूं।


एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सहिष्णुता, आत्म सम्मान और अस्मिता में संतुलन बनाने की जरूरत है। प्रजातंत्र में कुशल सरकार वही है जो सबसे कमजोर व्यक्ति का हित करे।


गोवंश की वृद्धि और गोवध बंद करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि गोवंश केवल आस्था का विषय नहीं, अपितु इससे आर्थिक, वैज्ञानिक, पर्यावरण, कृषि संवर्धन आदि तमाम विषय जुड़े हैं। गो वंश को लेकर वोट की राजनीति करना इस विषय का अवमूल्यन करना होगा।


कहा कि गो हत्या बढ़ेगी तो किसानों की आत्महत्या बढ़ेगी। कहा कि आज देश में सात आदमियों पर मात्र एक गोवंश है। इसमें वृद्घि करनी होगी।   नर गोवंश का प्रयोग कृषि में करना होगा। बिहार में भाजपा की हार से जुड़े सवाल पर कहा कि केवल एक मुद्दे पर किसी भी पार्टी की हार का कारण मानना उचित नहीं होगा।


इसी प्रकार केंद्र की भाजपा सरकार को उन्होंने  कहा कि  कमजोर व्यक्ति के हितों का ध्यान सरकार को रखना चाहिए। इंसाफ पर सभ्ाा का बराबर हक और अधिकार है। वैसे भी जनादेश के अनुसार पांच साल तक सरकार के कार्यों को देखना उचित होगा।
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