मऊ में घाघरा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटवर्ती इलाके के लोग सहम गए हैं। इन दिनों घाघरा की उठती हिलोरें खतरा बिंदु छूने को बेताब हैं। जलस्तर में 24 घंटे में 66 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी के जलस्तर बढ़ने का क्रम जारी रहा तो कभी भी नदी खतरा बिंदु पार कर सकती है। बता दें कि घाघरा का खतरा बिंदु 69.9 मीटर है। वहीं बृहस्पतिवार को घाघरा का जलस्तर 69 मीटर दर्ज किया गया। नदी के रौद्र रूप को देखते हुए तटवर्ती इलाकों सहित कस्बे के ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है।
बृहस्पतिवार को नदी के जलस्तर में 24 घंटे में 66 सेमी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नगर सहित तटवर्ती इलाके के लोगों में खलबली मच गई।किसानों को नदी के कहर बरपाने की चिंता सताने लगी है। उनका कहना है कि कटान से हर वर्ष कई बीघे खेत घाघरा में समा जाते हैं। गौरीशंकर घाट पर घाघरा का जलस्तर बृहस्पतिवार को 69 मीटर रहा। बुधवार को 68.34 मीटर था। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 66 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
धर्मस्थलों और धरोहरों के अस्तित्व को खतरा
घाघरा के जलस्तर में तेजी से हो रही बढ़ोत्तरी से मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, डीह बाबा का मंदिर, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला, शाही मस्जिद सहित विभिन्न ऐतिहासिक धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं बहादुरपुर, रामपुर धनौली, नई बाजार, नवली, सरया, पतनई, ठाकुरगांव, गोधनी बीवीपुर ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, ठीकरहिया, रसूलपुर, सूरजपुर सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों को बाढ़ आने की चिंता सताने लगी है। खेतों में रोपी गई धान की फसल के डूबने की आशंका से किसान चिंतित हैं।