मऊ। जिले में इन दिनों वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। खेतों में जलाई जाना वाली पराली, वाहनों से निकलने वाला जहरीला धूआं, ईंट भट्ठे और कूड़ा जलाने से निकलने वाले धूआं से लोगों के सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि वायु प्रदूषण से होने वाले दुष्प्रभावों से बचने के लिए सावधानी अनिवार्य रूप से अपनानी चाहिए।
वरिष्ठ चिकित्सक डा. जीएल केसरवानी ने बताया कि प्रदूषण के कारण कमजोरी होना, वजन कम होने के साथ जल्दी थकान होना, सीने में बार-बार संक्रमण होना, कफ के साथ खांसी आने की परेशानी बढ़ सकती है। प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़े के मरीजों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे बचाव के लिए घर से बाहर निकलते समय ट्रिपल लेयर का मास्क अनिवार्य रूप से उपयोग करें। खुद को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान कदापि ना करें। सांस का व्यायाम नियमित तौर पर करें। फेफड़े और धमनियों के सुकड़ने के कारण शरीर के अंगों तक आक्सीजन नहीं पहुंच पाती। जिससे मल्टिपल बाड़ी आर्गन फेल्योर होने का खतरा रहता है। घरों में कमरे पूरी तरह से वेंटिलेटेड होने चाहिए। सभी को पौष्टिक आहार लेने के साथ अपनी दिनचर्या को नियमित रखने की जरूरत है।