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Mau News: 13 साल पुरानी खटारा बसों से यात्री कर रहे सफर

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मऊ। वर्तमान में जहां लोग बीएस-6, बीएस-5 की रोडवेज बसों से सफर कर रहे हैं। वहीं मऊ में 13 साल पुरानी खटारा बसों से यात्री सफर करने को विवश हैं। ऐसी छह बसें हैं जो 13 साल से मऊ डिपो में सेवा दे रही हैं। जो 11 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं।
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नियमत: इन्हें अब तक नीलाम हो जाना चाहिए था। लेकिन इन्हें चलाया जा रहा है। इस विषय में रोडवेज के अधिकारियों कहना है कि चालक परिचालकों की कमी से सात से आठ बसों का नियमित संचालन नहीं हो पाता है। तो इन्हीं पुरानी बसों को रोक कर नई बसों को भेजा जाता है। मऊ डिपो के बेड़े में इन दिनों 53 बसें हैं। इनमें से 43 निगम की और 10 अनुबंधित हैं। निगम की छह बसें 13 साल से सेवा दे रही हैं जो 11 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। मऊ डिपो में पुरानी टेक्नोलॉजी वाली आठ, बीएस-3 की 23, बीएस-4 की एक और बीएस-6 की आठ बसें हैं। इस साल अब तक निगम की तीन नई बसें मऊ डिपो की मिली हैं।
पुरानी बसों की हालत इतनी जर्जर है कि कहां रास्ते में खराब हो जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता। कई वर्षों से मरम्मत व रंग रोगन कर बसें चलाई जा रही हैं। खिड़कियों के शीशे बंद करने के लिए लाक तक नहीं हैं। कल पुर्जे इतने ढीले हो चुके हैं कि चलने पर खटर पटर की आवाज आती है। ऐसे में यात्रियों को काफी परेशानी होती है।
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अपना समय पूरा कर लेने वाली बसों को नीलाम कर दिया जाता है। समय और दूरी पूरी हो जाने पर परिवहन विभाग द्वारा आरसी जारी की जाती है और सूचना दे दी जाती है कि अब इस बस का संचालन नहीं हो सकता है। नवंबर-2023 में ही दो बसें नीलाम हुई थीं।
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- हरिशंकर पांडेय - एआरएम, मऊ
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