मऊ। जिला अस्पताल में शीघ्र ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट बनाई जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब तक एक यूनिट का लाभ एक मरीज को ही मिलता है। लेकिन नई व्यवस्था के बाद एक यूनिट ब्लड को चार भाग में अलग-अलग बनाया जाएगा। इसके बाद एक यूनिट ब्लड का लाभ जरूरत के अनुसार चार मरीजों को मिलेगा। ब्लड बैंक के बगल में ही भवन बनाने के लिए स्टीमेट बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 400 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। जनपद में अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के ही काम आता है। इसके साथ ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा आदि निकालने की सुविधा नहीं होने से डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए वाराणसी रेफर करना पड़ता था।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को चार अलग-अलग भाग में बांटा जा सकेगा। इसके बाद जरूरतमंदों को रक्त के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। घायलों और सिजेरियन केस में पीड़ितों को ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। वहीं, डेंगू, आग से जलने आदि कई मामलों में मरीजों को सिर्फ ब्लड के सहयोगी तत्व चढ़ाने की जरूरत होती है। ब्लड बैंक में ब्लड से तत्व अलग-अलग करने की सुविधा नहीं होने से दिक्कतें आती हैं।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में ब्लड से चार अलग-अलग तत्व निकाले जाएंगे। इसके बाद ब्लड के चार तत्वों में से जिस तत्व की जरूरत होगी, उसे वही तत्व दिया जाएगा। इस मामले में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृज कुमार ने बताया कि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के समीप जमीन चिंहित कर ली गई है। स्टीमेट बनानेे की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
ऐसे कार्य करेगी कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
मऊ। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सरिता ने बताया कि ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। इनमें रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट शामिल हैं। सेपरेशन यूनिट में रक्त की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट रक्त से तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है।