सरकार की तरफ से शुरू की गई एक जिला एक उत्पाद योजना बुनकरों व छोटे कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही है। यहां की बनी साड़ियों की मांग देश के विभिन्न प्रांतों में तेेजी से बढ़ रही है। चार वर्ष मेें योजना के तहत लगभग एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। साथ ही अप्रत्यक्ष तौर भी हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
जिले में लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के शासन की तरफ से एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की गई। इसके तहत साड़ी उद्योग का चयन किया गया। जिले में साड़ी कारोबार प्रतिमाह 500 करोड़ टर्नओवर का होता है। सरकार की तरफ से शुरू की महत्वाकांक्षी योजना जिले के बुनकरों तथा छोटे कारोबारियों को रास आने लगी है। इससे जहां युवा स्वावलंबी हो रहे हैं। वहीं अप्रत्यक्ष रुप से लोगों को रोजगार मिल रहा है। कुल मिलाकर चार साल से चलाई जा रही ओडीओपी योजना ने आम आदमी के साथ ही बुनकरों के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है। हर हुनरबाज को काम देने का आधार भी बनती जा रही है। अधिकारियों की मानें तो लाकडाउन तथा कोरोना संक्रमण काल के चलते असर पड़ा है। यदि सामान्य स्थिति रही होती तो तस्वीर बेहतर होती। आंकड़ों पर नजर डाला जाए वर्ष 2018-19 में छह, 2019-20 में 15, 20-21में 26, 21-22 में 13 सहित 60 इकाइयां लगाकर 300 लोगों को रोजगार दिया गया। इसी क्रम में एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत प्रोत्साहन योजना के तहत हस्तशिल्प निर्माताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी में प्रतिभाग करने के लिए 80 हस्तशिल्पियों ने प्रतिभाग किया। ओडीओपी के तहत युवाओं को 10 दिन का प्रशिक्षण देकर पावरलूम टूल किट का प्रशिक्षण देकर 900 लोगों को रोजगार दिया गया। ओडीओपी के तहत ही सामान्य सुविधा केंद्र की स्थापना होगी। प्रक्रिया शुरू हो गई है। कारोबारियों के अनुसार सरकार ने लघु, मध्यम उद्योग तथा स्वरोजगार को बढ़ाने के लिए ओडीओपी के तहत बेहतर सुविधा दिया। नई सरकार से काफी अपेक्षाएं हैं।