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Mau News: चैत्र नवरात्र के पहले दिन देवी मंदिरों में उमड़े भक्त, रात तक गूंजे जयकारे

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जिले में रविवार को चैत्र नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री की आराधना की गई। श्रद्धालुओं ने मां को इलायची दाना, नारियल, चुनरी, मिष्ठान अर्पित कर मन्नतें मांगी और वैचारिक विकार दूर करने की गुहार लगाई।
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नगर क्षेत्र के माता पोखरा स्थित शीतला माता धाम, दुर्गा मंदिर रोडवेज, दुर्गा मंदिर फातिमा तिराहा, वनदेवी धाम कहिनौर, देई मां मंदिर खुरहट, दुर्गा मंदिर कोपागंज, भवानी माई मंदिर कोयलमर्याद मांदी सिपाह, अष्टभुजा मंदिर निधियांव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। देवी मंदिरों में सुबह पांच बजे से शुरू दर्शन-पूजन का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। रात दस बजे तक मंदिर जयकारे से गूंजते रहे। मंदिरों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। घरों में व्रतियों ने विधि विधान से कलश स्थापना की। नवरात्र के मद्देनजर जिले के प्रमुख मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई है।
पं.वीरेंद्र शुक्ला ने बताया कि नौ दुर्गा में प्रथम अवतार शैलपुत्री को प्रकृति की देवी माना जाता है। देवी भक्तों को पर्यावरण संतुलन के लिए प्रेरित करती है। मान्यता के अनुसार देवी का प्रथम अवतार सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक विचारों को प्रभावित करता है। शैलपुत्री की आराधना मात्र से ही मनुष्य के वैचारिक विकार दूर हो जाते हैं। शास्त्रों, पुराणों के मुताबिक हिमालय की पुत्री होने के कारण ही दुर्गा के पहले अवतार का नाम शैलपुत्री पड़ा। प्रकृति के भावों को स्पष्ट करने के लिए ही देवी के प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैल पुत्री की आराधना की जाती है। रानीपुरब्लाॅक क्षेत्र के सिरियापुर स्थित देईया माई मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला दिखा। दोहरीघाट क्षेत्र में लोगों ने देवी मंदिरों में विधि विधान से पूजन-अर्चन किया। वलीदपुर क्षेत्र के देवलास, सियाबस्ती, भातकोल, इटौरा चौबेपुर में कपाट खुलने से पहले से ही देवी मंदिरों में श्रद्धालु पहुंच गए थे। मुहमदाबादगोहना क्षेत्र में लोगों ने व्रत रखकर पारंपरिक तरीके से मां दुर्गा के पहले अवतार की पूजा की।
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पिपरीडीह क्षेत्र के मंदिरों में लोगों ने मां दुर्गा की पूजा की। बोझी बाजार में लोगों ने मां कोयल मर्याद भवानी माई की आराधना की। अमिला के कायस्थ टोला स्थित मां दुर्गा मंदिर, ठाकुरद्वारा परिसर स्थित मां काली मंदिर दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालु उमड़े। इंदारा में प्राचीन दुर्गा मंदिर जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा। घोसी में शारदा मंदिर, सीताकुंड स्थित मां शीतला मंदिर में आदि शक्ति की आराधना की गई।
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