मऊ। जिला कहने के लिए वन मंत्री का है, लेकिन यहां पर वन क्षेत्र पर कोई बेहतर कार्य नहीं होता है, इसका जीता जागता उदाहरण वन का रकबा और धड़ल्ले से संचालित गैर लाइसेंसी आरा मशीने हैं। विभाग की मानें तो सिर्फ 59 आरा मशीनों को ही लाइसेंस जारी किया गया है, लेकिन आलम यह है कि हर तहसीलों में अकेले 25 से पचास आरा मशीनें संचालित है। इससे जहां विभाग को राजस्व की क्षति हो रही है, वही हरित क्रांति को नुकसान पहुंच रहा है, इससे पर्यावरण असंतुलन में वृद्धि हो रही है।
मऊ जिले में वर्तमान समय में वन क्षेत्र 519.027 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में फैला है, लेकिन अभी भी149 हेक्टेयर वन क्षेत्र की वृद्धि की जानी है, इस तरह से जिले में लाइसेंसी आरा मशीनों की संख्या 59 है। इसमें मऊ रेंज में 12 लाइसेंस, घोसी रेंज में 21, मोहम्मदाबाद गोहना में 11 और दोहरीघाट रेंज में 15 आरा मशीनों को लाइसेंस जारी किया गया है। इसके बाद जो भी आरा मशीने संचालित है, सभी गैर लाइसेंसी है। इन मशीनों से विभाग को लाइसेंस शुल्क के रुप में 17000 से लेकर 30000 रुपया आता है। इस तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि विभाग को संचालित लाइसेंसी आरा मशीनों से प्रति वर्ष 14 से 15 लाख रुपया राजस्व वसूली होती है। चूंकि लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी जटिल है, इसके चलते विभागीय मिली भगत से लोग बिना लाइसेंस के ही आरा मशीनों को संचालित करते है। इससे विभाग को लाखों रुपये की चपत लगती है, साथ ही जिले में हो रहे पेड़ों की कटाई पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा। सूत्रों की मानें तो वन विभाग के साथ पुलिस की मदद से ये आरा मशीनें संचालित है, इसका परिणाम है कि इन गैर लाइसेंसी मशीनों पर सस्ते में लकड़ी की चीराई का कार्य बिना रजिस्टर मेंटेन के होता है। वन विभाग और पुलिस विभाग के कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर आरा मशीनों के संचालक सहयोग करते हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के रतनपुरा क्षेत्र में मात्र दो लाइसेंसी आरा मशीन है, लेकिन देखा जाए तो अकेल इस क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक आरा मशीने संचालित है।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा आरा मशीने है संचालित
मऊ। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले के रतनपुरा ब्लाक के साथ दोहरीघाट ब्लाक क्षेत्रों में ज्यादा आरा मशीने संचालित है। इसमें एक नंबर पर रतनपुरा क्षेत्र है, इस क्षेत्र में धड़ल्ले से हरे पेड़ों की कटाई का काम भी किया जाता है।
इस तरह की शिकायतें मुझे मिली हैं, इस बार मऊ आने पर इसकी जांच कराने का आदेश जारी किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी होगा उसके विरुद्घ कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी। चाहे वो आरा मशीन का संचालक हो या फिर विभाग का अधिकारी और कमचारी।- दारा सिंह चौहान, वन मंत्री उप्र सरकार।
इस तरह के गोलमाल की जानकारी तो नहीं है, लेकिन यदि जिले में ऐसा खेल हो रहा है तो अवश्य कल से इस पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। -संजय विश्वाल, जिला फारेस्ट अधिकारी मऊ।