मऊ। जिले के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज कराना यानी भगवान का साक्षात दर्शन करने के सामान कहा जाए तो यह अतिश्योक्ति न होगी। दरअसल इन अस्पतालों न केवल कई बेहतर डाक्टर्स की तैनाती है, बल्कि आधुनिक मेडिकल उपकरण भी उपलब्ध है, लेकिन इसका लाभ आम जनमानस को मिलना मुश्किल है। ऐसा ही एक मामला दोहरीघाट सीएचसी पर देखने को मिल रहा है। दो वर्ष पूर्व मरीजों की जांच के लिए आई मशीन का अब तक शुभारंभ तक नहीं हो सका है। यही स्थिति एक वर्ष पूर्व आई अल्ट्रासाउंड मशीन की है। हालात यह है कि सुविधा होने के बाद भी इसका लाभ न मिल पाने पर आने वाले मरीज बाहर में जांच कराने को बाध्य हैं। उधर शिकायत करने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार समस्या को लेकर आंख बंद कर बैठे हुए हैं।
दोहरीघाट नगर पंचायत सहित पूरे ब्लाक के 74 गांवों के लाखों ग्रामीणों के उपचार के लिए बना दोहरीघाट सीएचसी आज खुद अपने उपचार की बाट जोह रहा है। 11 चिकित्सकों के पद वाले इस अस्पताल में वर्तमान में केंद्र प्रभारी सहित पांच चिकित्सकों को ही तैनाती है। इतना ही नहीं यहां ओपीडी में आने वाले 200 से ज्यादा मरीजों में से 50 से ज्यादा मरीज जिन्हें जांच जिसमें एक्सरे, अल्ट्रासाउंड भी शामिल होता है। वह उसकी जांच बाहर निजी पैथालॉजी सेंटर पर मंहगे दरों पर कराने को मजबूर है।
चौकाने वाली बात है कि यह समस्या उस समय है जब दोहरीघाट सीएचसी में आधुनिक डिजीटल एक्सरे मशीन तथा अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। डिजिटल एक्सरे मशीन जहां दो वर्ष पूर्व आई, लेकिन आज तक इस पर मरीजों का जांच शुरू नहीं हो सका। यही स्थिति बीते वर्ष आई अल्ट्रासाउंड मशीन की भी है। अस्पताल सूत्रों की माने तो एक्सरे मशीन में तकनीकि खराबी आने पर दो माह पूर्व दिल्ली से इंजीनियरों की टीम आकर इसे बनाकर गई थी, लेकिन इसे चालू करते ही यह दोबारा बंद हो गई।
दोहरीघाट सीएचसी के प्रभारी डॉ. फैजान अहमद ने बताया कि तकनीति समस्या के चलते डिजिटल एक्सरे मशीन का संचालन नहीं हो पा रहा है। इस समस्या को लेकर जिला मुख्यालय के बड़े अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है।