घोसी नगर के बड़ागांव शिया मुहल्ले में मुहर्रम की आठवीं तारीख़ पर जलते अंगारे पर चलते ताजिएदार। सं
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मुहर्रम की आठवीं तारीख को घोसी के बड़ागांव शिया मोहल्ले में कर्बला के शहीदों की याद में जुलूस निकाला गया। इस दौरान इमाम हुसैन के छह महीने के बेटे अली असगर को विशेष रूप से याद किया गया। अकीदतमंदों ने अजाखाने अबूतालिब से निमतले सहन तक अलम व ताबूत का जुलूस निकाला।
यह धार्मिक जुलूस बुधवार रात करीब 2 बजे तक चला। निमतले सहन में अंगारों पर मातम किया गया। इस अवसर पर इब्राहिम नबी को भी याद किया गया। मौलाना शफकत तकी ने तकरीर की और समाज को हुसैनी किरदार अपनाने का संदेश दिया।
मौलाना तकी ने बताया कि इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने इंसानियत के लिए कुर्बानी दी थी। अंजुमन सज्जादिया ने जुलूस में नौहा-ख्वानी और मातम किया। आठवीं मुहर्रम के दिन अब्बास अलमदार की शान में हाज़री की मजलिस हुई।
अब्बास इमाम हुसैन के भाई थे और उनकी वफादारी व बहादुरी की मिसाल दी जाती है। उन्होंने अपने भाई के लिए जान की कुर्बानी दी थी। इस मौके पर ग़ज़नफर अब्बास, तफहीम हैदर, इफ्तेखार और शाहिद हुसैन सहित कई अकीदतमंद मौजूद रहे।