मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच वीरान से हो गए मऊ जंक्शन पर यात्रियों की चहल-पहल बढ़ गई है। स्टेशन से महानगरों को जानी वाली ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें अधिकांश प्रवासी शामिल हैं, जो कि संक्रमण की दूसरी लहर में अपने घर को लौट आए थे। जो अब वापस अपने कर्मभूमि महानगरों की और लौटते दिख रहे हैं। इससे जहां महानगरों को जानी वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग मिल रही है तो दूसरी तरफ इससे रेलवे का राजस्व अब बढ़ता दिख रहा है।
वर्ष 2020 में बढ़े कोरोना संक्रमण के बाद से सबसे ज्यादा प्रभाव रेलवे पर पड़ा। लेकिन दूसरी लहर में महज दो ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। इसका परिणाम रहा कि इस बार कोरोना महामारी में भी ट्रेनों का आवागमन जारी रहा। हालांकि इस लहर में अधिकांश प्रवासी होली के बाद पंचायत चुनाव के चक्कर में महानगर से चलकर आए थे, लेकिन यहां आने के बाद बढ़ी महामारी का शिकार होकर फंस गए। लेकिन जैसे ही महामारी में कुछ राहत हुई प्रवासी पुन: महानगरों का रुख करने लगे हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में एक अप्रैल से मुंबई, दिल्ली, गुजरात अन्य महानगरों के लौटने का क्रम पिछले वर्ष की भांति देखने को मिला। वहीं महानगरों को जाने वाले यात्रियों की संख्या में 70 फीसदी तक गिरावट आई थी। हालात यह था कि मुंबई जाने वाली दादर, गोदान, साप्ताहिक हमसफर, गोरखपुर एलटीटी एक्सप्रेस के अलावा दिल्ली को जाने वाली ट्रेन लिच्छवी, आनंद बिहार में दो सप्ताह तक 150 से 170 तक यात्री प्रतिदिन यात्रा करने के लिए आरक्षण कराते थे। वर्तमान में संक्रमण का ग्राफ कम होने के बाद बीते सात दिन से इन ट्रेनों के अलावा अहमाबाद जानी वाली साबरमति के अलावा सरयु यमुना, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। डीसीआई अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि इन दिनों प्रतिदिन 300 से लेकर 350 आरक्षण स्टेशन से कराया जा रहा है। बताया कि वर्तमान में दिल्ली जानी वाली लिच्छवी एक्सप्रेस के स्लीपर में 150 वेटिंग, सेकेंड तथा थर्ड एसी में 15 से ज्यादा वेटिंग तो जनरल में 14 जून तक सीटें आरक्षित है। यहीं स्थिति मुंबई जानी वाली चारों ट्रेनों में है।
दूना हुआ रेलवे का राजस्व, राजस्व में हो रही निरंतर वृद्धि
मऊ। संक्रमण की दूसरी लहर के चलते दो सप्ताह पूर्व तक स्टेशन से 150 से 170 तक यात्री आरक्षण करा रहे थे। इससे रेलवे को 50 से 75 हजार रुपये तक राजस्व प्राप्त हो रहा था। वर्तमान में आरक्षण संख्या 350 से ज्यादा होने से प्रतिदिन डेढ़ लाख रुपये का राजस्व मिल रहा है। आंकड़ों पर गौर करे तो 2 जून को 1 लाख 50 हजार, 1 जून को 1 लाख 40 हजार और 31 मई को 1 लाख 30 हजार से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ था।