मझवारा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में नान कोविड मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल ही सहारा बने हुए है। लेकिन इसमें कुछ अस्पतालों की लापरवाही इन मरीजों के घातक साबित हो रही है। मंगलवार को ऐसी ही लापरवाही घोसी तहसील के मझवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखने को मिली। जहां शासन के निर्देश के बाद भी अस्पताल की इमरजेंसी बंद रही। ऐसे में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को बिना इलाज के बैरंग लौटना पड़ा।
घोसी तहसील के मझवारा कस्बा में 20 से ज्यादा गांव की हजारों की आबादी के उपचार के लिए मझवारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहा है। इसमें चिकित्सक तथा फार्मासिस्ट की तैनाती है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने पर शासन के निर्देश पर सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद कर इमरजेंसी में केवल मरीजों का उपचार किया जा रहा है। मंगलवार को बुखार, सर्दी, जुकाम, खांसी आदि समस्या होने पर इलाज के लिए पवनी, मझवारा आदि गांवों से लोग जब इलाज कराने के लिए पीएचसी की इमरजेंसी पहुंचे तो यह अस्पताल बंद होना मिला। इलाज पहुंचे जयशंकर पांडेय, शिवम शुक्ला, संजय चौहान, मनोन राय, अश्वनी कुमार आदि ने बताया कि वह सुबह दस बजे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन दो घंटे के इंतजार के बाद भी न तो कोई चिकित्सक अस्पताल पहुंचा न ही कोई स्वास्थ्यकर्मी।ऐसे में मजबूर होकर कुछ लोग बैरंग अपने गांव लौट गए तो कुछ घोसी सीएचसी पहुंचकर इलाज कराया।