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बाजार तो खुले लेकिन नहीं मिल रहा ऑर्डर

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मऊ। कोरोना संक्रमण का असर जिले के फर्नीचर कारोबार पर सीधा पड़ा है। मार्च माह से लाकडाउन तथा संपूर्ण बंदी से फर्नीचर कारोबारी कराह रहे हैं। अब बाजार खुलने लगा है, लेकिन न तो आर्डर मिल रहा हैं और ग्राहक भी नदारद हैं। कारोबारियों के पास माल डंप पड़ा है। पांच माह मेें आठ लाख से अधिक की होने वाला कारोबार अब वर्तमान पांच माह में दो लाख पर आ गया है।
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कोरोना की मार हर क्षेत्र, हर वर्ग पर पड़ रही है। उद्योग, व्यापार बेपटरी हुए हैं। व्यवसाय मंदा होने से हर कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। मार्च, अप्रैल में लॉकडाउन तथा बाद में ज्यादा संख्या में कोरोना मरीजों के मिलने से पूरा बाजार बंद रहा। अब पूरी तरह से बाजार खुल रहे है तो अब न तो आर्डर मिल रहा है औ न ही ग्राहक पहुंच रहे हैं। कारोबारियों की मानें तो लाकडाउन में लगन सहित मांगलिक कार्यक्रम बीत गया या टल गया। इसके बाद संपूर्ण बंदी रही। आगे भी अनिश्चिय की स्थिति बनी हुई है।
आर्डर न मिलने से सोफे, बैड, टेबल, कुर्सी, आलमारी आदि का माल डंप पड़ा है। पार्टियों के पास पैसा फंसा पड़ा है। सेलिंग घटने से फर्नीचर कारोबारियों के समक्ष आर्थिक संकट संकट उत्पन्न होने लगा है। कोरोना से हर व्यक्ति का कामकाज प्रभावित होने के कारण लोगों की परचेजिंग पावर घटती जा रही है। कारोबारियों की मानें तो मार्च माह से ही कारोबार डाउन होता जा रहा है। हालत यह है कि जहां लाकडाउन के पूर्व पांच माह में आठ लाख का बिजनेस हो जाता था। अब वर्तमान पांच माह में अब न्यूनतम स्तर पर आ गया है। हालत यह है कि कारोबारी नया आर्डर न मिल पाने से परेशान हैं।
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नगर के फर्नीचर कारोबारी पंकज विश्वकर्मा का कहना है कि लाकडाउन के दौरान ही शादी तथा मांगलिक कार्यक्रम बीत गया। रक्षाबंधन के दिन भी दुकान बंद करने का फरमान था। बाजार खुलने की समय फिक्स कर दिया गया है। ऐसे में कारोबार पर असर पड़ रहा है। लाकडाउन से पांच माह पूूर्व तीन लाख कारोबार हो जाता था। अब वर्तमान पांच माह में 50हजार ही हो पाया है। समझ में नहीं आ रहा है।
मधुबन के फर्नीचर कारोबारी अमानत अली का कहना था कि कोरोना संक्रमण ने कारोबार को तबाह कर दिया है। लाकडाउन से पूर्व पांच माह पूर्व 50 हजार रुपया प्रति माह हो जाता था। अब वर्तमान पांच माह में कोई नया आर्डर नहीं मिल रहा है। नाम मात्र काम मिल रहा है। किसी तरह कारीगरों की मजदूरी ही निकल पा रही है।
मुहम्मदाबादगोहना कस्बा के फर्नीचर कारोबारी सरोज विश्वकर्मा का कहना था कि कोरोना से कारोबार ठप पड़ा है। लाकडाउन में ही लगन आदि बीत गया। लाकडाउन से पांच माह पूर्व तीन लाख का कारोबार हुआ था। अब 1.50 लाख पर आ गया है। यहीं के ही फर्नीचर कारोबारी जितेंद्र चौहान का कहना था कि पहली बार इतना बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। लाकडाउन से पूर्व पांच माह में आठ लाख का बिजनेस हुआ था। अब दो लाख पर आ गया है।
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