मऊ। बदलते मौसम ने फेफड़े से जुड़ी बीमारी बढ़ गई है, कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज में छाती रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में हर दिन 150 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसमें 40 से 50 मरीज सांस और अस्थमा से पीड़ित हैं।
दिन में गर्मी और रात में ठंड बढ़ने से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग की डॉ आसमां हबीब ने बताया कि मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण हवा में धूल के कण और नमी बढ़ने से एलर्जी, खांसी, जुकाम और अस्थमा के मरीजों की शिकायतें आम हो गई हैं। प्रदूषण और धुआं भी इन बीमारियों को बढ़ा रहा है। वहीं चेस्ट फिजिशियन डॉ. सुमित आर्य ने बताया कि यह समय खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और दमा के मरीजों के लिए अधिक जोखिम भरा है, क्योंकि इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
ठंडी हवा और धूल-मिट्टी के कारण श्वास नली में सूजन हो जाती है, इससे सांस फूलना, सीने में जकड़न, खांसी और थकान जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं। उन्होंने मरीज को सलाह दी कि धूल और धुएं में वह मास्क का प्रयोग करें। सुबह-शाम ठंडी हवा में बाहर निकलने से बचें और गर्म पानी का सेवन करें। साथ ही यह भी बताया कि अस्थमा से पीड़ित लोग इनहेलर का नियमित उपयोग करें और धूल या धुएं वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें। ठंडे पानी से न नहाएं, गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें।
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सांस फूलने से होती है परेशानी
शुगर के मरीजों में छाती में संक्रमण के केस आने लगे हैं। इस समय ब्रोंकाइटिस की भी परेशानी बढ़ी है। जो कि बुखार और खांसी से शुरू होती है। एक दो दिन बाद कफ निकलने लगता है। छाती के एक हिस्से में दर्द होने लगता है। सांस फूलने से परेशानी होने लगती है। मौसम बदलने से वायरल और बैक्टिरियल संक्रमण बढ़ने लगता है। ऐसे में जो मरीज शुगर से पीड़ित हैं। उन्हें बेहद सजग रहने की जरूरत है।
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ओपीडी में आने वाले 15 फीसदी अस्थमा के पीड़ित
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन और सीएमएस डॉ धनंजय कुमार ने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में 15 फीसदी अस्थमा के मरीज हैं। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आएगी, मरीजों की संख्या और बढ़ेगी। अस्थमा के पुराने रोगी इस मौसम में सुबह और शाम की सर्दी से बचाव रखें। गुनगुने पानी का सेवन करें। कोविड के नियमों का भी पालन करते हुए सेनिटाइजर का उपयोग करें और मास्क पहनें।