मऊ। यातायात नियमों को तोड़ने के दौरान सीज किए गए वाहनों को सुरक्षित करने की मंशा फेल होती नजर आ रही है। वाहनों को खड़ा करने के लिए सीसी कैमरे से लैस डिटेंशन यार्ड के लिए अभी तक जमीन नहीं मिली है। जिसके चलते एआरटीओ और यातायात पुलिस द्वारा सीज किए गए वाहन थाना परिसर, पुलिस लाइन, रोडवेज बस स्टैंड परिसर में खुले में खड़े रहते हैं।
जब तक वाहन स्वामी चालान भरकर छुड़ाता है तब तक वाहन धूप और बारिश से खराब हो जाते हैं। डिटेंशन यार्ड एक तरह का सरकारी टैक्सी स्टैंड है। सीज वाहन को छुड़ाने के साथ वाहन खड़ा करने का भी किराया लगेगा। वाहन स्वामी जब तक वाहन नहीं छुड़ा लेता तब तक किराया देना होगा।
बड़े छोटे वाहनों के लिए अलग अलग शुल्क लेने की योजना है। निर्माण के लिए परिवहन विभाग बीते 10 माह से जमीन चिह्नित करने जुटा है। डिटेंशन यार्ड बनने के बाद चेकिंग के दौरान पकड़े सीज किए गए बड़े वाहनों को एक सप्ताह में 1000 या 500 रुपये देने होंगे। फिर एक सप्ताह बाद प्रतिदिन के हिसाब से 150 रुपये शुल्क देना होगा। कार या अन्य चार पहिया वाहनों को पहले सप्ताह में 1000 रुपये और फिर उसके बाद 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जमा करन होगा। बाइक के लिए पहले सप्ताह में 100 रुपये और उसके बाद रोजाना 50 रुपये देय होगा। इस नियम के लागू होने से वाहन चालकों में यातायात नियमों को तोड़ने के आंकड़ों में कमी दर्ज हो सकती है।
चेकिंग के दौरान सीज वाहनों को खड़ा करने के लिए जिले में डिटेंशन यार्ड बनाना है। इसके लिए जमीन चिह्नित करने की कवायद चल रही है। डिटेंशन यार्ड पूरी तरह सुरक्षित होगा जिससे खड़े वाहनों को कोई नुकसान न हो। यहां सीसी कैमरे लगवाए जाएंगे, उसमें चौकीदार और गार्ड भी तैनात किए जाएंगे। - सुहेल अहमद, एआरटीओ, मऊ