मऊ। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की पांचवीं सूची जारी कर दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार कम होता लिंगानुपात काफी चिंताजनक है। हालांकि रिपोर्ट में कुछ सकाकारात्मक तो कुछ चिंता का विषय बने हुए हैं। मिनिस्ट्री आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की तरफ से किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार जिले में लिंगानुपात बढ़ने के बजाए अप्रत्याशित रूप से काफी घटी है।
2015-16 में जहां 1000 पुरुषों के मुकाबले 1092 महिलाएं थीं। लेकिन वर्ष 2020-21 में हुए सर्वे में लिंगानुपात में अत्यधिक कमी आई है। नवीन सर्वे में यह संख्या 989 रह गई है। सर्वे के अनुसार पिछले पांच वर्षों में तुलनात्मक एक हजार लड़कों में 938 लड़कियों का ही जन्म हुआ है। जबकि 2015-16 में यह दर 987 की थी।
गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण, आयरन की गोली का सेवन, प्रसव, शिशु टीकाकरण आदि के क्षेत्रों में पिछले सर्वे के अपेक्षा में काफी सुधार हुआ है। वहीं परिवार नियोजन सामग्रियों को भी लेकर लोगों में काफी जागरूकता आई है। पिछले सर्वे में जहां 34 फीसदी लोग ही परिवार नियोजन के तरीकों का इस्तेमाल करते थे, वहीं नवीन सर्वे में 54 फीसदी से अधिक लोग इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि कई मामलों में लोगों में जागरूकता आई है। लेकिन अभी भी स्वास्थ्य के कई मामलों में लोग गंभीर नहीं हो रहे हैं। वहीं पांच वर्ष में लिंगानुपात का कम होना काफी चिंताजनक है।
नवीन सर्वे में बाल विवाह में आई कमी
मऊ। वर्ष 2015-16 में किए गए सर्वे के अनुसार 20 से 24 वर्ष आयु की 14 प्रतिशत लड़कियों का विवाह 18 वर्ष पूरा होने से पहले ही हो गया था। नवीन सर्वे के अनुसार यह आंकड़ा घटकर 11 फीसदी रह गया है। 15 से 19 वर्ष की उम्र में मां बनने वालों की संख्या में पिछले सर्वे में 2.6 प्रतिशत था, जबकि 2020-21 में यह आंकड़ा दशमलव तीन फीसदी रह गया है।
मऊ के सीएमओ डॉ. श्याम नारायण दूबे ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे के आंकड़ा जारी किया गया है। पिछले सर्वे की अपेक्षा लिंगानुपात कम हुआ है। स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव जाकर लोगों को शासन द्वारा चलाई जा रही स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के प्रति जानकारी देने के साथ उन्हें प्रेरित किया जा रहा है।