मऊ। कोरोना संक्रमण के नए वेरियेट ओमिक्रॉन के खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार खुद को सर्तक रहने का दावा कर रहे हैं लेकिन यह केवल दावा केवल कागजों पर दुरुस्त दिख रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर है। मंगलवार को बड़राव सीएचसी की ओपीडी का लाइव कवरेज के दौरान यह खोखला दावा की सच्चाई दिखी। सुबह 11.30 बजे तक अस्पताल की ओपीडी में सात चिकित्सकों में से केवल दो ही डॉक्टर ओपीडी में मौजूद मिले, शेष अस्पताल से नदारद मिले। सबसे चौंकाने वाली बात है कि अस्पताल के केंद्र अधीक्षक खुद ही अपने कक्ष से नदारद मिले।
मंगलवार को टीम अमर उजाला सुबह 11 बजे बड़राव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। टीम सबसे पहले ओपीडी कक्ष में पहुंची। यहां भी टीम को डॉ. प्रदीप कुमार मौर्या तथा आयुष चिकित्सक डॉ. पीएन सिंह अपने चेंबर में मरीजों का उपचार करते मिले, जबकि दूसरे डॉक्टरों के चेंबर में ताला लटका मिला। चौंकाने वाली बात है कि केंद्र अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार भी अपने चेंबर से गायब मिले।
जानकारी में पता चला कि ओपीडी में सात चिकित्सकों की ड्यूटी है, लेकिन मौके पर केवल दो ही चिकित्सकों के मिलने से अस्पताल प्रबंधन के सर्तकता का सहज अंदाजा चलता है। उधर, काफी देर से कई मरीज दूसरे चिकित्सकों के चेंबर के बाहर डॉक्टरों के आने की राह देख रहे थे। इस दौरान स्टॉफ नर्स बिंदु राय, मनोराम, डेंटल हाईजीनिस्ट तनवीर कौशल, फार्मासिस्ट शिवप्रसाद तथा लैब टेक्नीशियन कन्हैया लाल अपने-अपने कक्ष में ड्यूटी निभाते मिले।
जिम्मेदारों को करनी चाहिए मानीटरिंग
अमिला। डाक्टरों के समय से अस्पताल न पहुंचने पर मरीज काफी नाराज रहे। एंटीरैबिज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचे मनीष यादव बोले कि उन्हें इंजेक्शन लगवाने से पहले डाक्टर से सलाह लेनी थी, लेकिन डाक्टर मौजूद ही नहीं मिले। वहीं इशरावती पांडेय ने बताया कि वह घुटना में दिक्कत होने पर दवा लेने के लिए अस्पताल पहुंची, लेकिन डाक्टर न मिलने से वह काफी परेशान रही। वहीं रेखा यादव, दिवाकर, संगीता ने भी डाक्टर न होने परेशानी की बात कही।