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नदियों में आई बाढ़ से किसानों की फसलों की हुई भारी बरबादी

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मऊ। जिले में तमसा नदी, सरयू नदी और अन्य नदियों में आई बाढ़ से किसानों की धान, अरहर ,सब्जी, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, परवल आदि फसलों की बरसात के पानी में डूबने से भारी क्षति हुई है। जिले की चारों तहसीलों में जल प्लावन से सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों की फसलें डूबकर सड़ व गल रही हैं। इधर, तमसा नदी में 15 दिनों से प्रतिदिन पानी बढ़ रहा है।
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तमसा नदी का ही पानी रतनपुरा ब्लॉक के इटौरा और गाढ़ा ताल के समीपवर्ती गांव में फसलों को डूबा दिया है। धान की फसल में रेडा और बाली इस समय लग रही है। यह फसल पानी में डूबने से सड़ और गल रही है। भाजपा नेता राकेश सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सर्वे कराकर किसानों को फसल डूबने से हुई क्षति का मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सिर्फ कागजों में लूटपाट की एजेंसी बनकर रह गई है। क्योंकि दो वर्ष पूर्व आई बाढ़ से हुई क्षति का मुआवजा/क्लेम बीमा कंपनी ने गांव में प्लॉट टू प्लॉट फोटोग्राफ वीडियो बनाकर सर्वे कर रिपोर्ट दिया कि जल प्लावन से 90 प्रतिशत फसलों की क्षति हुई है लेकिन कोई मुआवजा/बीमा क्लेम किसानों को नहीं मिला।
भाजपा नेता ने बताया कि रतनपुरा ब्लॉक के ग्राम खालिसपुर, मखना, इटौरा, खूंटी पृथ्वीपुर, इशहाकपुर, गोबरिया, सिधवल, बिलौवा, बीबीपुर, नगवा, जोगापुर, दतौरा, गाढ़ा, सेहबरपुर, मडैली बड़नपुरा, मुस्तफाबाद, पिलखी, पिंडोहरि, लसरा, पीपरसाथ, ठईचा, कोनिहा, रेता आदि गांवों में फसलों की भारी क्षति हुई है और लगातार पानी बढ़ने से प्रतिदिन बरबादी बढ़ती जा रही है। बहुत से गांव में पशुओं के चारे की समस्या आ गई है। राकेश सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की फसलों की क्षति को देखते हुए तत्काल मुआवजा दिया जाय अन्यथा वह भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन को बाध्य होंगे।
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