मऊ। प्रदेश में एक बार फिर से विधान सभा चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू कर दी गई है। लेकिन जिले की आबादी के अनुरूप सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना नहीं हो सकी है। जिले में विश्वविद्यालय खोलने की मांग लंबे समय से हो रही है। लगभग डेढ़ दशक पूर्व कृषि विश्वविद्यालय की मंजूरी तो मिली थी, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते वह भी गैर जनपद चला गया।
हालत यह है कि जनपद में मात्र चार सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज, दो राजकीय डिग्री कॉलेज की सुविधा है। महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की मांग के अनुरूप सभी विषयों के पढ़ने की सुविधा नहीं मिलती है। इससे छात्र छात्राओं को गैर जनपद जाना पड़ता है। जिले की आबादी लगभग 25 लाख है। आजादी मिलने के दशकों बाद भी जिले में आबादी के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना नहीं की गई। जिले में चार सहायता प्राप्त तथा दो राजकीय डिग्री कालेजों की ही स्थापना हो सकी है।
मधुबन तहसील में राजकीय डिग्री कॉलेज का भवन निर्माण प्रक्रिया चल रही है। जो सरकारी उच्च शिक्षण संस्थान खुले भी हैं वहां छात्रों की मांग के अनुरूप सभी विषयों के पढ़ने की सुविधा नहीं है। जबकि जिले में यूपी बोर्ड, आईसीएसई, सीबीएसई से संबद्ध विद्यालयों से हजारों छात्र प्रतिवर्ष 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। ऐसे में मध्यम तथा गरीब तबके के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ रहा है या महानगरों या गैर जिलों की ओर रुख करना पड़ता है। उसमें भी संसाधनों का अभाव है।