दुबारी के हरिजन बस्ती निवासी भानु को पहले 51,795 और दूसरी बार 47,570 रुपये का बिजली बिल मिला। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कौन सा बिल जमा करें। ये जानने के लिए एक सप्ताह लगातार मधुबन गए, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी समाधान नहीं कर पाए। भानु जैसे कई उपभोक्ता हैं जो बिजली निगम की इस लापरवाही से भ्रमित हैं कि कौन सा बिल भरें।
विद्युत उपकेंद्र दुबारी और मोलनापुर के बिजली उपभोक्ता इन दिनों बिल सुधार के लिए एक से दूसरे दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं, जबकि इस समय बिजली निगम द्वारा एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत विद्युत उपकेंद्रों पर कैंप लगाए जा रहे हैं।
उच्चाधिकारियों की कड़ाई और बकाया बिल जमा कराने के चक्कर में उपभोक्ताओं को दो-दो बार अलग-अलग धनराशि का बिल भेजा जा रहा है। दुबारी और मोलनापुर विद्युत उपकेंद्र पर बिल जमा और संशोधन की व्यवस्था नहीं होने से उपभोक्ताओं को 15 किमी दूर मधुबन जाना पड़ता है। एक बिल का संशोधन होने के दो दिन बाद दूसरी बिल भेज दिया जा रहा है। दुबारी के हरिजन बस्ती निवासी भानु ने बताया कि कौन सा बिल भरें, ये जानने के लिए एक सप्ताह लगातार मधुबन गए, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी समाधान नहीं कर पाए। अधिक बिजली बिल आने से परेशान महेश प्रसाद, लक्ष्मी शंकर विश्वकर्मा, जयनाथ यादव, श्रीराम, शिवम शर्मा, श्री किशुन मौर्य, रामहरख ने बताया कि बिजली बिल जमा करने के बाद भी उन्हें 40 से 50 हजार रुपये तक का बिल आया है। बताया कि पहले मीटर रीडिंग के लिए कर्मचारी आते थे और बिल देकर चले जाते थे। उसी आधार पर बिल जमा होता था, लेकिन अब कोई नहीं आता, उन्हें मोबाइल चलाना नहीं आता।
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