मऊ। महिलाओं के उपचार को लेकर जनपद में वर्ष 2018 में जिला महिला अस्पताल का निर्माण कराया गया। अस्पताल में नवजात से लेकर गर्भवती और प्रसूता के उपचार के लिए अनेक प्रकार की हाईटेक सुविधा भी दी जाती है। अस्पताल में चिकित्सक से लेकर सैकड़ों स्वास्थ्यकर्मी काम करते हैं। लेकिन अस्पताल के चालू होने के छह साल बाद भी यहां काम करने वाले चिकित्सक और कर्मचारी के लिए कोई भी आवास नहीं बन सका है।
लगभग पौने एकड़ में 20 करोड़ की लागत से 100 बेड के जिला महिला अस्पताल भवन के निर्माण किया गया है। लेकिन अभी तक यहां काम करने वाले अस्पताल परिसर के बाहर किराए का मकान लेकर रहते हैं। अस्पताल से आवास की दूरी हाेने पर कर्मचारियों को परेशानी होती है। अस्पताल में आवास नहीं होने से मरीजाें को भी इसका खामियाजा भोगना पड़ता है। खासतौर पर रात में जब भी कोई गंभीर केस आता है, तो चिकित्सक को कॉल करने पर बुलाना पड़ता है। निवास स्थान दूर होने पर तीमारदार अपने मरीज को मजबूरी में निजी अस्पतालाें में ले जाने के लिए विवश हो जाते हैं। अस्पताल के ठीक बगल में कई भवन जर्जर बने हुए हैै, जो पूरी तरह निष्प्रयोज्य है। अभी तक इन जर्जर भवनोंं को गिराने की भी कोई कवायद नहीं की गई है। यदि इन भवनोंं को गिरा दिया जाए तो आसानी से यहां आवास बनाया जा सकता है। जिससे अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक और कर्मियों को अस्पताल के परिसर में आवास मिल जाएगा। इससे कर्मियों को सहूलियत मिलने के साथ मरीजों को भी उपचार में सहायता मिलेगी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ जय शंकर प्रसाद ने कहा कि जिला महिला अस्पताल के चिकित्सक ओर कर्मियों के लिए आवास नहीं होने से परेशानी होती है। आवास के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।