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कम अंक पाने के बाद भी मेहनत से मिलती सपनों की उड़ान

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यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के घोषित परीक्षा परिणाम में कम अंक पाने छात्र छात्राओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। मनोवैैज्ञानिकों की मानें तो कम अंक आने पर छात्र छात्राएं निराश न हों। जरूरी नहीं हर छात्र की प्रतिभा का आकलन बेहतर अंकों से ही किया जाएगा। बेहतर प्रयास के बाद भी यदि परिणाम अच्छा नहीं आया है तो विद्यार्थियों को मायूस होने की जरूरत नहीं है। इसे जीवन का पहली और आखिरी परीक्षा नहीं समझना चाहिए।
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यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम शनिवार को घोषित हो गया। तमाम ऐसे विद्यार्थी हैं जो बेहतर अंक हासिल नहीं कर पाने से उदास हैं। उनके अभिभावक भी परेशान हैं। इस संबंध में डीसीएसके पीजी कालेज के मनोविज्ञान असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र नाथ चौबे का कहना है कि बोर्ड परीक्षा में कुछ कमी की वजह से ही विद्यार्थियों को कम अंक मिला है। अभिभावकों को अपने बच्चे की अन्य विद्यार्थी से तुलना करने के बजाय मनोवैज्ञानिक से काउंसिलिंग करानी चाहिए। निश्चित रूप से टॉपर्स के पास बेहतर कालेज में प्रवेश के अधिक मौके होते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कम अंक आने वाले छात्रों में प्रतिभा की कमी होती है। कहा कि हमारी जानकारी में 20 ऐसे विद्यार्थी रहे हैं जो परीक्षा में 50 प्रतिशत कम अंक प्राप्त किए। लेकिन आज वह अपनी कमी को दूर करते हुए कड़ी मेहनत से मुकाम हासिल किया है। करियर काउंसलिंग के लिए आने वाले ऐसे विद्यार्थियों की सफलता का प्रतिशत अधिक देखा गया है, जिन्होंने हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में बेहतर प्रदर्शन नहीं किया था। बोर्ड परीक्षा में अक्सर विद्यार्थी उम्मीद से कम प्रदर्शन कर पाते हैं, जिसका अहम कारण है कि परीक्षा के परिणाम को लेकर बच्चों पर तनाव अधिक होता है। कम अंक आने के बाद जरूरी है कि छात्र की प्रतिभा का मूल्यांकन किया जाए। इसमें अभिभावक व अध्यापक अहम भूमिका अदा करते हैं। वहीं जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद का कहना था कि बोर्ड परीक्षा में कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को हताश होने की जरूरत नहीं है। कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों ने भी प्रशासनिक सहित अन्य सेवाओं में सफलता हासिल किया है।
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विशेषज्ञों की सलाह
- विद्यार्थी की गतिविधि पर निगरानी रखें
- बेहतर अंक लाने वाले अन्य छात्र से तुलना न करें
- विद्यार्थी जिस विषय में बेहतर है, उसकी तारीफ करें
-- करियर के अन्य बेहतर विकल्प पर चर्चा करें
- इसमें विद्यार्थी की रुचि को भी शामिल करें
- विद्यार्थी को अकेले या फिर एकांत में बिल्कुल न रहने दें
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