शासन की तरफ से माध्यमिक शिक्षा पर भारी भरकम बजट खर्च करने के बाद भी यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम में राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय प्रदेश मेरिट में तो दूर जिलास्तरीय टाप टेन में जगह नहीं बना सके। जबकि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालय हावी रहे।
वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने टॉप टेन मेरिट लिस्ट में बड़ी संख्या में स्थान बनाया है। कई सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का रिजल्ट शत प्रतिशत रहा। उसके 90 प्रतिशत से अधिक परीक्षार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण किया है।
जिले में 14 राजकीय, 67 सहायता प्राप्त सहित 436 मान्यता प्राप्त विद्यालय हैं। बोर्ड परीक्षा हाईस्कूल में 42990 के मुुकाबले 37405 परीक्षार्थी शामिल हुए। जबकि इंटरमीडिएट में 34663 के मुकाबले 30964 परीक्षार्थी शामिल हुए। गत शनिवार को घोषित यूपी बोर्ड हाईस्कूल, इंटर का परीक्षा परिणाम में प्रदेश स्तरीय टाप टेन में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की छात्राएं तथा जनपद स्तरीय टाप टेन में 22 छात्र छात्राओं ने जगह बनाने में सफलता हासिल किया। लेकिन प्रदेश स्तरीय टापटेन तो दूर जनपदीय टापटेन सूची में राजकीय तथा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय जगह नहीं बना पाए। सरकारी तथा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के कई प्रधानाचार्य दबी जुबान से निजी स्कूलों के छात्र नकल के दम पर मेरिट में जगह बनाए हैं। निजी स्कूलों का प्रबंध तंत्र भी सहयोग करता है। जबकि सरकारी विद्यालयों में कालेज प्रशासन रुचि ही नहीं लेता है। जांच कराए जाए तो सच सामने आ सकता है। इस बाबत डीआईओएस डॉ.राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि रिजल्ट की समीक्षा की जाएगी। जिले के सभी राजकीय तथा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से रिपोर्ट मांगी गई है।