मऊ। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के गाढ़ा ताल की जलनिकासी के लिए बने नाले की सफाई जिलास्तरीय समिति कराएगी। ताल में वर्ष भर जमा रहने वाले पानी की निकासी होने पर सैकडों एकड़ जमीन में खेती करना संभव हो सकेगा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने शासन को रिपोर्ट भेजी है।
गाढ़ा ताल में खोहिया नाला सहित छोटे-बड़े नाले गिरते हैं। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से बरसात का पानी और नालों का पानी ताल में ही वर्ष भर जमा रहता है। दशकों पूर्व गाढ़ा ताल की जलनिकासी के लिए गाढ़ा, नगवा, सरायभारती होते हुए सीताकुंड में गिराने के लिए नाले का निर्माण कराया गया था, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते नाला पटता गया।
इससे क्षेत्र के गाढ़ा, रतनपुरा, मुबारकपुर, दतौड़ा, बीबीपुर, सिधवल, खालिसपुर, मुस्तफाबाद, मड़ैली, सेहबरपुर सहित एक दर्जन से अधिक गांवों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊं जमीन में हमेशा ताल का पानी जमा रहता है। शासन प्रशासन के उदासीन रवैए से आहत ग्रामीणों ने चंदे से जेसीबी से नाले की खुदाई कार्य शुरू कराकर जिला प्रशासन को आइना दिखाया था। इस मामले में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते हुए जिलाधिकारी से रिपोर्ट मांगा था। एसडीएम की आख्या पर सिंचाई विभाग ने अधीक्षण अभियंता बलिया को अग्रसारित किया।
अधीक्षण अभियंता ने शासन को भेजे रिपोर्ट में लिखा है कि गाढ़ा ताल की जलनिकासी के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। साथ ही सफाई कराने के लिए मऊ जनपद में गठित जिलास्तरीय समिति के समक्ष प्रस्ताव अनुमोदन के लिए भेज दिया गया है। समिति से मंजूरी तथा धन का आवंटन मिलने पर मशीन से सफाई करा दी ।